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बिना 'शोध गंगा' पर थीसिस डाले नहीं मिलेगी PhD की उपाधि, बिहार राज्यपाल सचिवालय का विश्वविद्यालयों को निर्देश

Published: Mon, 12 Oct 2026 02:21 PM (IST)

राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालयों को पीएचडी थीसिस शोध गंगा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया है। लापरवाही बरतने वाले विश्वविद्यालयों ...और पढ़ें

पोर्टल पर रिसर्च थीसिस अपलोड किए बिना शोधार्थी को नहीं मिलेगी पीएचडी की उपाधि (AI Generated Image)

पोर्टल पर रिसर्च थीसिस अपलोड किए बिना शोधार्थी को नहीं मिलेगी पीएचडी की उपाधि (AI Generated Image)

HighLights

  1. पीएचडी थीसिस शोध गंगा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य।

  2. राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालयों की लापरवाही पर जताई नाराजगी।

  3. शोध में पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य।

राज्य ब्यूरो, पटना। शोध गंगा पोर्टल पर विश्वविद्यालयों के द्वारा पीएचडी की डिग्री प्रदान करने से पहले शोध प्रबंध की थीसिस की सॉफ्ट कॉपी अपलोड करना अनिवार्य है। इस पोर्टल पर रिसर्च थीसिस अपलोड किए बिना किसी भी शोधार्थी को पीएचडी की उपाधि नहीं मिल सकेगी।

इस मामले में राज्यपाल एवं कुलाधिपति सचिवालय ने कुलपतियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिया है। साथ ही, सचिवालय प्रशासन ने पोर्टल पर अपलोडकिए गए पीएचडी थीसिस के बारे में रिपोर्ट देने को कहा है।

निर्देश में स्पष्ट है कि पीएचडी मौखिक परीक्षा संपन्न होने के हफ्ते भर के अंदर शोधार्थी के शोधप्रबंध पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।

दरअसल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पहले से पीएचडी के शोध कार्य में नकल पर नकेल कसने के उद्देश्य से शोध गंगा पोर्टल पर रिसर्च थीसिस को अपलोड करना अनिवार्य कर दिया है, लेकिन इस मामले में राज्य के विश्वविद्यालयों द्वारा बरती जा रही लापरवाही पर राज्यपाल एवं कुलाधिपति सचिवालय ने नाराजगी व्यक्त की है।

अब तक राज्य के विश्वविद्यालयों में पहले कर चुके 20,152 पीएचडी धारकों की थीसिस को पोर्टल पर ऑनलाइन किया है, जबकि करीब पचास हजार पीएचडी धारकों की थीसिस पोर्टल पर अपलोड कार्य पूरा करना है।

बता दें कि पिछले माह बिहार लोक भवन में कुलपतियों की बैठक में पोर्टल पर शोध प्रबंध अपलोड करने की सुस्ती को गंभीरता से लेते हुए राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को थीसिस को पोर्टल पर अपलोड करने में तेजी लाने को कहा था।

राज्यपाल एवं कुलाधिपति द्वारा सभी विश्वविद्यालयों को यह निर्देश भी दिया गया था कि वे जल्द से जल्द लंबित थीसिस को पोर्टल पर अपलोड करें ताकि शोध में पारदर्शिता बनी रहे।

इसका मुख्य उद्देश्य शोध की गुणवत्ता बढ़ाना, साहित्यिक चोरी रोकना और शोध को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुलभ बनाना है, लेकिन मगध विश्वविद्यालय, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, बीएन मंडल विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालयों द्वारा पोर्टल पर थीसिस को अपलोड करने में लापरवाही बरती जा रही है।

शोध गंगा पोर्टल:

राज्यपाल सचिवालय के एक अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार के तहत शोध गंगा पोर्टल संचालित है जो एक नेशनल डिजिटल रिपॉजिटरी है। इस पोर्टल पर विभिन्न विश्वविद्यालयों में जमा पीएचडी थीसिस डिजिटल रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं।

इसका उद्देश्य शोध कार्यों को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराना, अकादमिक पारदर्शिता बढ़ाना और एक ही विषय पर अनावश्यक दोहराव को रोकना है।

पोर्टल पर अपलोड होने के बाद शोधार्थियों के कार्य देश-विदेश के शोधकर्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए संदर्भ सामग्री के रूप में उपलब्ध होते हैं। यूजीसी शोध कार्यों की डिजिटल उपलब्धता और अभिलेखीकरण को गंभीरता से देखता है और बढ़ावा देने पर जोर देता है।

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