बिहार के विश्वविद्यालयों में खाली सीटों पर ही होंगे PhD में एडमिशन, राज्यपाल ने दिए ऑडिट के आदेश
राज्य के विश्वविद्यालयों में अब निर्धारित पीएचडी सीटों के आधार पर ही शोध कार्य कराए जाएंगे, राज्यपाल ने कुलपतियों को इस संबंध में आदेश दिया है।

सैयद अता हसनैन (फाइल फोटो)
HighLights
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में निर्धारित पीएचडी सीटों पर शोध का आदेश दिया।
एलएन मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी सीटों की गड़बड़ी की जांच होगी।
ऑडिट कमेटी 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी, पारदर्शिता पर जोर।
राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य के विश्वविद्यालयों में निर्धारित पीएचडी सीटों के आधार पर ही शोध कार्य कराए जाएंगे। सीटों की संख्या तय करते समय यह भी ध्यान रखा जाएगा कि संबंधित शोध पर्यवेक्षकों के अधीन पहले से कितने शोधार्थी काम कर रहे हैं और निर्धारित मानकों के अनुसार वे कितने और शोधार्थियों का मार्गदर्शन कर सकते हैं। इस संबंध में राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने कुलपतियों को आदेश दिया।
उन्होंने ललित नारायण (एलएन) मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा में पीएचडी नामांकन हेतु बिना अनुमति के सीटों की संख्या बढ़ाने एवं शोध पर्यवेक्षण क्षमता में गड़बड़ी की शिकायतों को गंभीरता से लिया है। पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच करने हेतु आडिट कमेटी गठित की गई है, जिसे 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
पीएचडी की सीटें तय करने की प्रक्रिया स्पष्ट
इसके मद्देनजर राज्यपाल ने पीएचडी की सीटें तय करने की प्रक्रिया स्पष्ट, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित करने का आदेश सभी कुलपतियों को दिया है।
उन्होंने कहा है कि पीएचडी में नामांकन से पहले प्रत्येक विश्वविद्यालय द्वारा हर विभाग और विषय में उपलब्ध वास्तविक शोध पर्यवेक्षण क्षमता का सही आकलन करना जरूरी है। पीएचडी की सीटों की संख्या उपलब्ध योग्य शोध पर्यवेक्षकों और उनके द्वारा शोधार्थियों को मार्गदर्शन देने की निर्धारित क्षमता के अनुरूप होनी चाहिए।
पीएचडी एडमिशन टेस्ट-24 के बारे में पूरी जानकारी ली
उन्होंने एलएन मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा में पीएचडी सीटों एवं शोध पर्यवेक्षण क्षमता में गड़बड़ी की जांच का आदेश देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो हर विश्वविद्यालय में आडिट कमेटी यह जांच करेगी कि पीएचडी प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय द्वारा विज्ञापित सीटें विभिन्न विषयों में उपलब्ध वास्तविक शोध पर्यवेक्षण क्षमता के अनुरूप हैं अथवा नहीं। पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया लागू नियमों, विनियमों एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित की जा रही है या नहीं।
दरअसल, सोमवार को राज्यपाल ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी को बिहार लोक भवन में बुलाकर पीएचडी एडमिशन टेस्ट-24 के बारे में पूरी जानकारी ली। उन्होंने कुलपति से यह भी पूछा कि विश्वविद्यालय में किस आधार पर पीएचडी की सीटों की संख्या बढ़ायी गई। संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर उन्होंने पीएचडी सीटों एवं शोध पर्यवेक्षण क्षमता का व्यापक जांच कराने का आदेश दिया। आडिट कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
