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30 करोड़ रुपये का कारोबार ठप, ई-फार्मेसी के खिलाफ बिहार में 40 हजार मेडिकल दुकानें बंद

Published: Wed, 20 May 2026 07:14 PM (IST)

बिहार में ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में दवा दुकानदारों ने 24 घंटे की हड़ताल की, जिससे राज्यभर में करीब 30 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।

थोक दवा बाजार में पसरा सन्नाटा

थोक दवा बाजार में पसरा सन्नाटा

HighLights

  1. ई-फार्मेसी के विरोध में बिहार में 24 घंटे की हड़ताल।

  2. राज्य में 40 हजार दुकानें बंद, 30 करोड़ का कारोबार प्रभावित।

  3. बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा बिक्री और AI पर्चों पर चिंता।

जागरण संवाददाता, पटना। ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के खिलाफ बुधवार को बिहार समेत देशभर में दवा दुकानदारों ने बड़ा प्रदर्शन किया।

बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन (BCDA) और ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट संगठन के आह्वान पर 24 घंटे की हड़ताल की गई, जिससे राज्य में करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।

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गोविंद मित्रा रोड से लेकर जिलों तक दिखा बंद का असर

एसोसिएशन के अनुसार हड़ताल के दौरान बिहार की करीब 40 हजार मेडिकल दुकानें बंद रहीं।

इस बंद का असर पूरे राज्य में देखने को मिला। अकेले पटना में लगभग 15 से 18 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान लगाया गया है।

राजधानी की साढ़े सात हजार से अधिक दवा दुकानें भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल रहीं।

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थोक दवा बाजार में पसरा सन्नाटा

पटना के गोविंद मित्रा रोड स्थित दवा मंडी में बंद का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला।

यह बिहार का सबसे बड़ा थोक दवा बाजार माना जाता है, जहां अधिकांश दुकानें दिनभर बंद रहीं। दुकानदारों ने रैली निकालकर सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध जताया।

दवा कारोबारियों ने कहा कि ऑनलाइन कंपनियां पारंपरिक मेडिकल दुकानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।

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मरीजों को राहत देने के लिए कुछ सेवाएं रहीं चालू

हड़ताल के बावजूद जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया।

नर्सिंग होम, अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्र और इमरजेंसी दवा सेवाएं सामान्य रूप से खुली रहीं ताकि मरीजों को परेशानी न हो।

एसोसिएशन ने कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना है।

ऑनलाइन दवा कंपनियों पर गंभीर आरोप

बीसीडीए के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि ई-फार्मेसी कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर बाजार का संतुलन बिगाड़ रही हैं।

एसोसिएशन के बिहार अध्यक्ष Parsan Kumar Singh और महासचिव Prabhakar Kumar ने कहा कि कई प्लेटफॉर्म बिना सही प्रिस्क्रिप्शन के भी दवाएं बेच रहे हैं।

उन्होंने इसे मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।

AI से बने पर्चों पर भी उठे सवाल

दवा कारोबारियों ने दावा किया कि अब AI से तैयार किए गए पर्चों के जरिए भी आसानी से दवाएं खरीदी जा रही हैं।

उनका कहना है कि इससे एंटीबायोटिक, गर्भपात और नारकोटिक्स दवाओं के दुरुपयोग का खतरा बढ़ रहा है।

एसोसिएशन ने सरकार से मांग की कि ई-कॉमर्स कंपनियों पर भी वही कानून लागू हों जो मेडिकल दुकानदारों पर लागू होते हैं।

मनमानी छूट से असली दवाओं पर भी सवाल

दवा दुकानदारों का कहना है कि ऑनलाइन कंपनियों द्वारा दी जा रही भारी छूट से असली और नकली दवाओं को लेकर भी संदेह पैदा हो रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा तय मार्जिन व्यवस्था के बावजूद ऑनलाइन कंपनियां मनमाने तरीके से दवाएं बेच रही हैं।

दुकानदारों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आगे और बड़ा आंदोलन किया जा सकता है।