राज्य ब्यूरो, पटना: बिहार में पंचायत चुनाव के पहले चरण के नतीजे चौंकाने वाले आए हैं। मुखिया के पांच वर्षों के कामकाज और तौर-तरीके के प्रति जबरदस्त नाराजगी दिखी है। नतीजे बता रहे हैं कि करीब 81 फीसद निर्वतमान मुखिया को एंटी इनकंबैसी का सामना करना पड़ा है। 

पहले चरण में दस जिलों के 12 प्रखंडों की 151 पंचायतों के चुनाव परिणाम आने लगे हैं। देर रात तक परिणाम का सिलसिला जारी है। समाचार लिखे जाने तक मुखिया पद के 119 पंचायतों के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं, जिनमें 96 मुखिया दोबारा जीतकर नहीं आ पाए। सिर्फ 23 को पुन: जीत मिली है। हालांकि, राज्य निर्वाचन आयोग ने आधिकारिक तौर पर 109 पंचायतों के परिणाम घोषित किए हैं।

जहानाबाद जिले के नतीजे तो और भी हैरान करने वाले हैं। जिले की 11 पंचायतों के परिणाम देर रात तक घोषित कर दिए गए। इनमें से किसी भी मुखिया को दोबारा जीत नसीब नहीं हुई है। सबके सब हार गए। बांका का भी यही हाल है। यहां 13 पंचायतों में सारे के सारे मुखिया हार गए। इस नतीजे से आगे के चरणों के चुनाव में किस्मत आजमा रहे निर्वतमान मुखिया को सतर्क हो जाने की जरूरत है। अन्य पदों के लिए हुए चुनाव के परिणाम भी कमोबेश ऐसे ही आ रहे हैं। आगे के चरणों के लिए गया जिले के नतीजे से वैसे प्रत्याशियों को थोड़ा सुकून मिल सकता है, जो पांच वर्ष पहले निर्वाचित हुए थे और इस बार भी मैदान में हैं। यहां देर रात तक 23 पंचायतों के नतीजे घोषित कर दिए गए थे, जिनमें से नौ मुखिया की वापसी हुई है। 

नए जनप्रतिनिधियों में अधिसंख्य युवा

पंचायतों की नई सरकार में युवा प्रत्याशियों के लिए शुभ संकेत है। अभी तक मुखिया पद के लिए जिन पंचायतों के नतीजे आ चुके हैं, उनमें 40 वर्ष से कम उम्र वाले ज्यादा हैं। करीब 60 फीसद प्रतिनिधि इसी उम्र समूह के हैं। नवादा जिले के निर्वाचित नौ मुखिया में सात की उम्र 40 वर्ष से कम है। सिर्फ दो इससे ज्यादा उम्र के हैं। 

Edited By: Akshay Pandey