जितेंद्र कुमार, पटना: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट नेटवर्क उपलब्धता की असलियत सामने आ गई है। प्रदेश में 151 जोन की पहचान की गई है जहां इंटरनेट नेटवर्क उपलब्ध नहीं (शैडो जोन) है। इस कारण राज्य निर्वाचन आयोग ने बूथों पर मतदाता की बायोमीट्रिक पहचान के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के अंतर्गत सेटेलाइट फोन और वायरलेस का प्रबंध करने का निर्देश जारी किया है। राज्य के जिन आठ जिलों में इंटरनेट शैडो जोन की पहचान की गई है उनमें गया, रोहतास, कैमूर, बांका, जमुई, पश्चिम चंपारण, मधुबनी और किशनगंज शामिल हैं। 

कैमूर में सर्वाधिक 80 शैडो जोन 

सबसे अधिक कैमूर में 80 और पश्चिम चंपारण जिले में 30 जोन हैं। गया जिले में 14 और रोहतास में 10 इंटरनेट कम्युनिकेशन शैडो जोन की पहचान की गई है। सबसे कम बांका में एक जोन मिला है। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रमंडलीय आयुक्त और जिला पंचायती राज पदाधिकारी को निर्देश दिया है कि बीएसएनएल सहित निजी दूरसंचार कंपनियों से समन्वय स्थापित कर इंटरनेट नेटवर्क पहुंचाने की व्यवस्था हो। 

इंटरनेट नेटवर्क विस्तार करने को कहा 

राज्य निर्वाचन आयोग ने बीएसएनएल, बीबीएनएल और सीएससी को 31 अगस्त को पत्र लिखकर इंटरनेट नेटवर्क विस्तार करने को कहा था। आयोग के सचिव ने निजी संचार कंपनियों से समन्वय स्थापित कर शैडो जोन में नेटवर्क विस्तार करने का निर्देश दिया है। आयोग पंचायत चुनाव में पहली बार बूथों पर मतदाताओं की पहचान बायोमीट्रिक प्रणाली से कराने की नई व्यवस्था करा रहा है। इस नई व्यवस्था में इंटरनेट की बाधा आड़े आने लगी है। आयोग ने हर हाल में इंटरनेट की बाधा दूर करने का आदेश जारी किया है। 

कितना क्षेत्र कम्युनिकेशन शैडो 

पंचायत चुनाव के लिए जोन में औसत पांच पंचायतों को शामिल किया गया है। पंचायत स्तर पर औसतन 12 से 14 बूथ बनाए गए हैं। प्रथम चरण में कैमूर, जमुई, बांका और रोहतास जिले में चुनाव 24 सितंबर को होना है। इससे पूर्व इन जिले में इंटरनेट शैडो जोन में नेटवर्क सुविधा बहाल करनी होगी। 

Edited By: Akshay Pandey