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बिहार पंचायत चुनाव में EBC आरक्षण का रास्ता साफ, आयोग की रिपोर्ट के आधार पर तय होंगी सीटें

Published: Wed, 16 Sep 2026 09:40 AM (IST)

बिहार में पंचायत चुनाव में अति-पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के आरक्षण का निर्धारण अब अति-पिछड़ा वर्ग आयोग करेगा। यह आयोग ईबीसी ...और पढ़ें

बिहार पंचायत चुनाव 2026। फाइल फोटो

बिहार पंचायत चुनाव 2026। फाइल फोटो

HighLights

  1. अति-पिछड़ा वर्ग आयोग पंचायत चुनाव में ईबीसी पिछड़ेपन का आकलन करेगा।

  2. आयोग ईबीसी आरक्षण के लिए सरकार को अपनी अनुशंसाएं देगा।

  3. यह पहल ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया को कानूनी मजबूती प्रदान करेगी।

राज्य ब्यूरो, पटना। Bihar Panchayat Election 2026 में अति-पिछड़ा वर्ग ईबीसी के पिछड़ेपन का आकलन अति-पिछड़ा वर्ग आयोग करेगा। उस आधार पर वह आरक्षण के लिए सरकार को अपनी अनुशंसाएं देगा।

बहरहाल त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले पंचायती राज विभाग ने इसका निर्णय लिया है। उल्लेखनीय है कि त्रि-स्तरीय पंचायतों में कुल 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान है, जिसमें अकेले ईबीसी के लिए 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

विभागीय मंत्री दीपक प्रकाश ने मंगलवार को बताया कि अति-पिछड़ा वर्ग आयोग को समर्पित आयोग घोषित कर दिया गया है। यह आयोग ईबीसी का इंपीरिकल डेटा तैयार करेगा।

ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल है। स्पष्ट है कि आयोग अब ईबीसी की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति के अध्ययन के साथ पंचायत स्तर पर उनके प्रतिनिधित्व का आकलन करेगा।

उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायत चुनाव में ईबीसी के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण होगा। उसी के साथ पंचायत चुनाव के लिए आरक्षित और सामान्य सीटों की तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी।

निर्णय के निहितार्थ

बिहार में ईबीसी का बड़ा सामाजिक आधार है। इसलिए राजनीति में भी यह वर्ग महत्वपूर्ण बना हुआ है। राज्य में ईबीसी की कुल संख्या 112 है। हाल ही में पटना हाई कोर्ट ने ईबीसी को आरक्षण देने के लिए नौकरी और शैक्षणिक संस्थानों से अलग व्यवस्था करने की टिप्पणी की थी।

ऐसे में समर्पित आयोग के जरिए ट्रिपल टेस्ट पूरा कराने की पहल को ईबीसी आरक्षण को कानूनी मजबूती देने का प्रयास माना जा रहा।

ट्रिपल टेस्ट : सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, आरक्षण के लिए तीन स्तर पर प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसमें पिछड़ेपन की स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक समर्पित आयोग का गठन प्रमुख है।

दूसरी प्रक्रिया प्रत्येक स्थानीय निकाय में आरक्षण के अनुपात का निर्धारण है। तीसरी प्रक्रिया यह सुनिश्चित करना है कि अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण निर्धारित सीमा से अधिक न हो।

इंपीरिकल डेटा : इसे आनुभविक डेटा भी कहते हैं, जिसे सीधे तौर पर प्रयोगों, अवलोकन या वास्तविक अनुभवों के माध्यम से इकट्ठा किया जाता है। यह किसी काल्पनिक सिद्धांत या केवल तर्क पर आधारित नहीं होता, बल्कि इसे ठोस साक्ष्यों द्वारा सिद्ध किया जा सकता है।

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