SIR पर बिहार में सियासी भूचाल: तेजस्वी बोले- कैंसर बना चुनाव आयोग, दीपंकर भट्टाचार्य ने मांगा CEC का इस्तीफा
विपक्षी दलों ने मतदाता-सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला बोला है, राजद के तेजस्वी यादव ने इसे लोकतंत्र के लिए कैंसर बताया।

तेजस्वी यादव और दीपंकर भट्टाचार्य। (फाइल फोटो)
HighLights
तेजस्वी यादव ने निर्वाचन आयोग को लोकतंत्र का कैंसर कहा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई।
विपक्ष ने भाजपा पर आयोग के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
राज्य ब्यूरो, पटना। मतदाता-सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरुद्ध विपक्षी खेमे में एक बार फिर उबाल है। राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने निर्वाचन आयोग को देश और लोकतंत्र के लिए कैंसर बताया है।
एक्स पर उन्होंने लिखा है कि ऐसा मैं पिछले छह वर्षाें से लगातार कह रहा। प्रधानमंत्री की लोकप्रियता पर संदेह जताते हुए उन्होंने भाजपा पर बेईमानी से चुनाव जीतने का आरोप लगाया।
भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से त्यागपत्र की मांग की है और निर्णायक आंदोलन की चेतावनी दी है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के प्रभार में रह चुके कौकब कादरी निर्वाचन आयोग, विशेषकर ज्ञानेश कुमार के रुख-रवैये को लोकतंत्र की हत्या बता रहे।
तेजस्वी बोले- भाजपा के मुख्यमंत्री कठपुतली
तेजस्वी ने कहा कि धरातल पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कोई लोकप्रियता नहीं। मैच रेफरी और अंपायर को फिक्स कर वे बेईमानी से चुनावी मैच जीत रहे हैं।
अगर मोदी जनता की सहायता से चुनाव जीत रहे होते, तो विजयी राज्यों में जनाधार वाले भाजपाई नेताओं को मुख्यमंत्री बनाते! राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, बिहार, बंगाल आदि राज्यों में उन्होंने कठपुतली मुख्यमंत्री बनाए हैं।
मोदी-शाह जानते है कि इन राज्यों में उन्हें निर्वाचन आयोग के अटूट समर्थन और अपार सहयोग से जीत मिली है, नहीं कि जनसमर्थन से! एक अन्य पोस्ट में तेजस्वी ने ग्रामीण सड़कों पर बन आए गड्ढों पर व्यंग्य करते हुए एक वीडियो अटैच किया है। लिखा कि गड्ढे में बाइक सवार महिला के गिरने को मंत्री सरकार को बदनाम करने का षड्यंत्र बता देंगे।
कांग्रेस बोली- लीपापोती नहीं चलेगी, हम फरियाएंगे
कौकब कादरी का कहना है कि राहुल गांधी के नेतृत्व कांग्रेस इस संघर्ष को निर्णायक मोड़ तक ले जाएगी। ज्ञानेश को सत्ता का संरक्षण मिल हुआ है। उनकी हरकतों से लोकतंत्र पर आघात हो रहा।
पोल खुलने पर लीपापोती होने लगी। सफाई-गवाही दी जा रही, लेकिन उसका कोई आधार नहीं। प्रेस-वार्ता में भी दोनों चुनाव आयुक्त कुछ नहीं बोले। अब बीएलओ लगाने को कह रहे। पहले ऐसा क्यों नहीं हुआ। ज्ञानेश कुमार के सारे निर्णय एकतरफा और मनमानी वाले रहे।
दीपंकर बोले- भाजपा से मिले हुए हैं ज्ञानेश कुमार
दीपंकर ने निर्वाचन आयोग पर भाजपा से मिलीभगत का आरोप लगाया है। रविवार को प्रेस-वार्ता कर उन्होंने कहा कि आयोग के भीतर से उठी आवाज इसकी पुष्टि कर रही।
ज्ञानेश को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से त्यागपत्र देना होगा, अन्यथा हम निर्णायक आंदोलन की ओर बढ़ रहे हैं। यह आंदोलन ज्ञानेश से शुरू होकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक जाएगा।
आयोग ने स्वीकार किया है कि आगे से बैठकों का एजेंडा पहले ही सर्कुलेट किया जाएगा। इससे पहले ऐसा क्यों नहीं हुआ, इसे स्पष्ट करे।
राज्य सचिव कुणाल ने बताया कि 10 विधानसभा क्षेत्रों से हटाए गए नामों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा। हम यथाशीघ्र इस सच्चाई को जनता के सामने लाएंगे। प्रेस-वार्ता में ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, विधान पार्षद शशि यादव, पोलित ब्यूरो के सदस्य धीरेंद्र झा और अमर उपस्थित रहे।
माकपा की मांग- ज्ञानेश पर दर्ज हो मुकदमा
माकपा के राज्य सचिव ललन चौधरी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया के साथ गड़बड़ी करने वाले ज्ञानेश कुमार पर मुकदमा चलना चाहिए। उन्हें अविलंब पद छोड़ना चाहिए। भाजपा ने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को कठपुतली बना दिया है। इसके विरुद्ध माकपा आंदोलन तेज करेगी।
भाकपा का आरोप- भाजपा की सहायता कर रहा आयोग
भाकपा के राज्य सचिव रामनरेश सिंह ने कहा कि एसआईआर के बहाने निर्वाचन आयोग वस्तुत: भाजपा की सहायता कर रहा। इसमें ज्ञानेश की करतूत भी उजागर हो गई है। विपक्ष का यह आरोप सिद्ध हो गया कि निर्वाचन आयाेग वस्तुत: भाजपा के इशारे पर काम कर रहा।
