राज्य ब्यूरो, पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि वे भाजपा विरोधी राजनीतिक दलों को एकजुट करने के अभियान में शामिल होंगे। समाज में टकराव फैलाने की कोशिश चल रही है। विपक्षी दलों की एकता आज की जरूरत है। उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री पद की दौड़ से अलग बताया। कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली विपक्ष की गोलबंदी के नेतृत्व का सपना भी वे नहीं देख रहे हैं। विपक्षी दलों के नेताओं से बातचीत हो रही है। विपक्षी दलों की एकता से ही कोई समाधान निकलेगा। देश की हालत अच्छी नहीं है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार जल्द होगा। 15 अगस्त के तुरंत बाद यह संभव है।

बीजेपी से खराब रिश्तों के पीछे की बताई वजह

शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार में भाजपा के साथ हुए अपने खराब रिश्ते की सिलसिलेवार ढंग से चर्चा की। उनके मुताबिक शुरुआत विधानसभा चुनाव से हुई। परिणाम के बाद हमारे जीते विधायक कह रहे थे कि उन्हें भाजपा से मदद नहीं मिली। पराजित उम्मीदवार अपनी हार के लिए सीधे भाजपा को जिम्मेवार बता रहे थे। उन्होंने कहा-मेरे मन में मुख्यमंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं थी। नीतीश ने कहा-इधर के दिनों में हमको कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। लोगों से बातचीत भी नहीं कर रहे थे। पार्टी के लोगों की आम राय भाजपा से अलग होने की थी। हमको अपनी पार्टी भी बचानी थी। 

'बिहार में होगा बेहतर काम'

नीतीश ने कहा कि राज्य की मौजूदा सरकार को सात दलों का समर्थन है। हम हमेशा काम करते रहे हैं। बीच के दिनों में थोड़ी रुकावट आई थी। अब पहले से बेहतर काम होगा। बहुत काम होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2015 का विधानसभा चुनाव राजद-कांग्रेस के साथ लड़े थे। इन दलों को छोड़ कर भाजपा के साथ आए। अनुभव अच्छा नहीं रहा। उन्होंने कहा कि ईडी और सीबीआइ जैसे एजेंसियों से उन्हें कोई भय नहीं है। देश में कानून है। संविधान है। कौन क्या कर रहा है, देश की जनता इसे देखती रहती है।

Edited By: Rahul Kumar