बिहार में NEET Re-Exam फर्जीवाड़े की EOU करेगी जांच, मेडिकल छात्रों और बायोमिट्रिक स्टाफ की साठगांठ से सेंधमारी
नीट पुनर्परीक्षा में लखीसराय में मेडिकल छात्रों और बायोमीट्रिक कर्मियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर धांधली का खुलासा हुआ ...और पढ़ें

एआई जनरेटेड फोटो
HighLights
नीट पुनर्परीक्षा में मेडिकल छात्रों-बायोमीट्रिक कर्मियों की मिलीभगत से धांधली।
मास्टरमाइंड एमबीबीएस छात्र रविशंकर उर्फ सम्राट फरार, 30 लोग गिरफ्तार।
आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) कर रही है मामले की गहन जांच।
जागरण टीम, पटना। नीट-यूजी पुनर्परीक्षा में लखीसराय में पकड़ी गई धांधली में सॉल्वर गिरोह से जुड़े मेडिकल छात्रों और बायोमीट्रिक कर्मियों की मिलीभगत सामने आई है। लखीसराय पुलिस ने मेडिकल कॉलेजों के छात्रों को सॉल्वर बनाकर बैठाने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है।
पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड BMIMS (भगवान महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) पावापुरी, नालंदा का एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष का छात्र रविशंकर उर्फ सम्राट बताया जा रहा, जो फरार है। इस मामले में अब तक 12 मेडिकल छात्र, एक मूल परीक्षार्थी और 17 बायोमीट्रिक कर्मी समेत कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) को इसकी जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ईओयू के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मामले में कवैया थाने में दो जबकि किऊल में एक कुल तीन प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसे ईओयू ने टेकओवर कर लिया है। गहनता से पूरे मामले की जांच की जा रही है।
इस तरह परीक्षा केंद्र के अंदर पहुंचे सॉल्वर मेडिकल छात्र
जांच में पता चला कि रविशंकर उर्फ सम्राट ने बायोमीट्रिक टेंडर प्राप्तकर्ता प्रमोद कुमार यादव से सांठगांठ कर पहले बायोमीट्रिक व्यवस्था को अपने प्रभाव में लिया। इसके बाद वैशाली निवासी और पटना मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ वर्ष के छात्र मयंक कश्यप को बायोमीट्रिक कर्मी अंकित कुमार की पहचान पर ड्यूटी में लगाया गया।
इसी नेटवर्क के माध्यम से फर्जी परीक्षार्थियों को बिना प्रभावी सत्यापन के परीक्षा केंद्रों के अंदर प्रवेश दिलाया गया। हसनपुर और केआरके हाई स्कूल केंद्र पर एक-एक तथा केंद्रीय विद्यालय केंद्र पर सात मेडिकल छात्रों को प्रवेश दिलाया गया था।
सभी को गिरफ्तार कर पूछताछ जारी है। वहीं मूल परीक्षार्थी संजीत कुमार, पिता विनोद कुमार, निवासी खपुरा, थाना नगरनौसा, जिला नालंदा को भी गिरफ्तार किया है। इसके अलावा सॉल्वर को साथ लेकर आए दो सहयोगी मेडिकल छात्रों को परीक्षा केंद्र के बाहर पकड़ा गया।
आठ राज्यों के छात्र बने थे सॉल्वर
लखीसराय में पकड़े गए सॉल्वर का जुड़ाव आठ राज्यों से है। इनमें बिहार के अलावा मध्यप्रदेश, ओडिशा, नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बंगाल, राजस्थान और झारखंड के मेडिकल छात्र शामिल हैं। गिरफ्तार सॉल्वरों में मंतोष कुमार (शंकरपुर, मधेपुरा) न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ वर्ष का छात्र है।
विवेक कुमार (हरचंदा, कांटी, मुजफ्फरपुर) एएनएमएम मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ वर्ष का छात्र है। हिमांशु कुमार (पथरा, सुपौल)- मध्यप्रदेश के सतना के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के प्रथम वर्ष का छात्र है।
सौरभ झा (राजनगर, मधुबनी) एम्स रायबरेली के चतुर्थ वर्ष का छात्र है। पूनम कुमारी (बरमसिया, गिरिडीह) बीएचयू की बीएससी नर्सिंग की छात्रा है। अमन अग्रवाल (हौज खास, नई दिल्ली)- यूनिवर्सिटी कॉलेज आफ मेडिकल साइंस, दिल्ली का एमबीबीएस इंटर्न है।
रौशन कुमार (बिशनपुर, लौकहा, मधुबनी) एनएमसीएच पटना के बी. फार्मा चतुर्थ वर्ष का छात्र है। चंचल कुमारी (शेरभुका, पलामू)- गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज ओडिशा की छात्रा है।
वहीं जितेंद्र कुमार (सवाई माधोपुर, राजस्थान) एनएमसीएच पटना का छात्र है। इस मामले में पकड़े गए स्कालरों के दो सहयोगी अर्पित सिंह (यादव नगर, भगवानपुर, मुजफ्फरपुर) एएनएमसीएच गया के एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष का छात्र जबकि रंजीत कुमार (खपुरा, नगरनौसा, नालंदा) बीएमआइएमएस पावापुरी के चतुर्थ वर्ष का छात्र है।
प्रति अभ्यर्थी 10 से 12 लाख रुपये में हुई थी डील
लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार एवं एसपी प्रेरणा कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में प्रति अभ्यर्थी 10 से 12 लाख रुपये तक की डील की बात सामने आई है। पुलिस अब गिरोह के आर्थिक लेन-देन, अन्य राज्यों में फैले संपर्कों और परीक्षा माफिया से संभावित रिश्तों की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, परीक्षा से ठीक पहले जिला प्रशासन को गुप्त सूचना मिली कि कुछ केंद्रों पर मूल अभ्यर्थियों के स्थान पर मेडिकल के छात्र बैठाए जाने वाले हैं। इसके बाद विशेष टीम गठित कर तीन परीक्षा केंद्रों उच्च विद्यालय हसनपुर, केआरके उच्च विद्यालय और केंद्रीय विद्यालय में सघन जांच शुरू की गई।
मामले का पहला तार हसनपुर केंद्र से जुड़ा। यहां परीक्षा शुरू होने से पहले एक संदिग्ध परीक्षार्थी को पकड़ा गया। पूछताछ में उसने अपना नाम मंतोष कुमार, पिता- शंभू यादव, निवासी- शंकरपुर, जिला- मधेपुरा बताया।
वह न्यू जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज का चतुर्थ वर्ष का छात्र है और संजीत कुमार की जगह परीक्षा देने पहुंचा था। मंतोष के उद्भेदन के बाद अन्य केंद्रों पर छापेमारी में सॉल्वर गिरोह का पूरा नेटवर्क सामने आ गया।
नीट की पुनर्परीक्षा में लखीसराय के तीन केंद्रों से नौ फर्जी अभ्यर्थी पकड़े गए हैं। इस फर्जीवाड़े में बायोमीट्रिक कर्मियों की मिलीभगत सामने आई है। करीब डेढ़ दर्जन बायोमीट्रिक कर्मी गिरफ्तार भी किए गए हैं। - सुधांशु कुमार, एडीजी, विधि-व्यवस्था
