बिहार MLC चुनाव: 8 सीटों पर वोटिंग 23 को, 150 उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे 5.32 लाख वोटर, समझें गणित
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा, जिसमें 5.32 लाख मतदाता 150 उम्मीदवारों का ...और पढ़ें

विधान परिषद की आठ सीटों पर 23 को मतदान।
HighLights
बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान।
5.32 लाख मतदाता 150 प्रत्याशियों का भविष्य तय करेंगे।
राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव महत्वपूर्ण, रणनीति की परीक्षा।
डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है। इसके लिए सभी निर्वाचन क्षेत्रों में प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
मतदान भले ही महज आठ सीटों पर हो रहा हो, लेकिन इसने राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों की बेचैनी बढ़ा दी है। एनडीए में जहां अनंत सिंह फैक्टर बने हुए हैं, वहीं महागठबंधन में कांग्रेस और राजद के बीच खींचतान चर्चा में है।
इन चुनावों में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी सीटों के साथ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की पटना, दरभंगा, सारण और तिरहुत सीटों पर मतदान होगा।
सभी आठ सीटों के लिए कुल 933 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर 5,32,847 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 3,86,199 पुरुष, 1,46,611 महिला और 37 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों पर 4,92,594 मतदाता हैं, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों पर 40,253 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। दोनों श्रेणियों के चुनावों में कुल 150 प्रत्याशी मैदान में हैं।
स्नातक सीटों पर 90, शिक्षक सीटों पर 60 प्रत्याशी मैदान में
विधान परिषद की आठ सीटों के लिए कुल 164 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया था। जांच के दौरान 12 प्रत्याशियों के नामांकन पत्र निरस्त कर दिए गए, जबकि दो प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिया। इसके बाद अब कुल 150 प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं।
स्नातक कोटे की चार सीटों के लिए 90 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। शिक्षक कोटे की चार सीटों के लिए 60 प्रत्याशी मैदान में हैं। सीमित सीटों पर मुकाबले के बावजूद राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव अहम माना जा रहा है।
स्नातक सीटों पर पटना में सबसे कम मतदान केंद्र
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों के लिए कुल 598 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें सबसे कम 134 मतदान केंद्र पटना निर्वाचन क्षेत्र में हैं। कोसी में 181, तिरहुत में 145 और दरभंगा में 138 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों के लिए कुल 335 मतदान केंद्र निर्धारित किए गए हैं। इनमें तिरहुत में सबसे कम 58 मतदान केंद्र हैं। दरभंगा में 99, सारण में 98 और पटना में 80 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
इस प्रकार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान केंद्रों की संख्या शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की तुलना में अधिक है। प्रशासन के सामने मतदान प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के साथ सभी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की चुनौती है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 4.92 लाख मतदाता
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों पर कुल 4,92,594 मतदाता हैं। इनमें 3,55,522 पुरुष, 1,37,038 महिला और 34 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं।
| निर्वाचन क्षेत्र | पुरुष | महिला | तृतीय लिंग | कुल मतदाता |
|---|---|---|---|---|
| कोसी | 1,01,056 | 33,013 | 3 | 1,34,072 |
| तिरहुत | 97,998 | 45,970 | 20 | 1,43,988 |
| दरभंगा | 90,006 | 36,938 | 7 | 1,26,951 |
| पटना | 66,462 | 21,117 | 4 | 87,583 |
| कुल | 3,55,522 | 1,37,038 | 34 | 4,92,594 |
मतदाताओं की संख्या के लिहाज से स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में तिरहुत सबसे आगे है। यहां 1,43,988 मतदाता हैं। इसके बाद कोसी में 1,34,072 और दरभंगा में 1,26,951 मतदाता हैं। पटना निर्वाचन क्षेत्र में सबसे कम 87,583 मतदाता हैं।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 40,253 मतदाता
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चार सीटों पर कुल 40,253 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 30,677 पुरुष, 9,573 महिला और तीन तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं।
| निर्वाचन क्षेत्र | पुरुष | महिला | तृतीय लिंग | कुल मतदाता |
|---|---|---|---|---|
| तिरहुत | 6,507 | 2,250 | 3 | 8,760 |
| दरभंगा | 6,958 | 2,068 | 0 | 9,026 |
| पटना | 8,413 | 3,306 | 0 | 11,719 |
| सारण | 8,799 | 1,949 | 0 | 10,748 |
| कुल | 30,677 | 9,573 | 3 | 40,253 |
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या के मामले में पटना सबसे आगे है। यहां 11,719 मतदाता हैं। सारण में 10,748, दरभंगा में 9,026 और तिरहुत में 8,760 मतदाता हैं।
राजनीतिक दलों के लिए क्यों अहम है चुनाव?
विधान परिषद की इन आठ सीटों पर होने वाला चुनाव राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है। सीमित सीटों पर मुकाबला होने के कारण प्रत्याशियों के साथ-साथ दलों की रणनीति और आपसी तालमेल की भी परीक्षा होगी।
एनडीए और महागठबंधन के लिए अपने समर्थक मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाना अहम रहेगा। एक ओर एनडीए के भीतर अनंत सिंह की भूमिका राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई है, तो दूसरी ओर महागठबंधन में कांग्रेस और राजद के बीच मतभेद चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।
ऐसे में 23 अक्टूबर को होने वाला मतदान न केवल प्रत्याशियों की चुनावी किस्मत तय करेगा, बल्कि बिहार की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहेगा।
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