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बिहार MLC चुनाव: मतदान से पहले स्कूल प्रबंधन समितियों पर नजर, CM सम्राट चौधरी ने विधायकों को सौंपा टास्क

Published: Sun, 11 Oct 2026 04:48 PM (GMT+05:30)

विधान परिषद चुनावों के लिए विधायक अब विद्यालय प्रबंधन समितियों के जरिए शिक्षक व स्नातक मतदाताओं तक पहुंच बना रहे हैं।

सीएम सम्राट चौधरी। (फाइल फोटो)

सीएम सम्राट चौधरी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. विधायक विद्यालय प्रबंधन समितियों से साधेंगे शिक्षक मतदाताओं को।

  2. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधायकों को दिया यह टास्क।

  3. शिक्षा व्यवस्था सुधार, शिक्षकों की समस्याओं पर रहेगा ध्यान।

राज्य ब्यूरो, पटना। शिक्षक व स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से विधान परिषद पहुंचने की तैयारी कर रहे जनप्रतिनिधियों और संभावित उम्मीदवारों की नजर अब 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान से पहले विद्यालय प्रबंधन समितियों पर है।

एनडीए में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश के उपरांत इन समितियों के माध्यम से एक मुस्त मतदाताओं तक पहुंच बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है।

मुख्यमंत्री एनडीए विधायकों को इसका टास्क सौंपा है। इसके तहत विधायक अपने क्षेत्र के विद्यालयों से जुड़े मुद्दों, शिक्षकों के लिए सरकार की उपलब्धियों एवं शिक्षा व्यवस्था में सुधार के सवालों को प्रमुखता से उठा रहे हैं।

माना जा रहा है कि स्नातक एवं शिक्षक मतदाताओं के बीच संपर्क बढ़ाने की यह कवायद चुनावों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

विदित हो कि स्नातक मतदाताओं के प्रभाव वाले औसतन 250 से 275 स्कूलों पर सीधे तौर पर एक विधायक का प्रभाव होता है।

पिछले उप चुनाव में स्नातक क्षेत्र में भी शिक्षक मतदाताओं ने बड़ी भूमिका प्रमाणित हो चुका है। वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की राजनीति में मतदाताओं से सीधा संवाद और उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा अहम भूमिका निभाता है।

ऐसे में विद्यालय प्रबंधन समितियां जनप्रतिनिधियों के लिए स्थानीय स्तर पर संवाद का एक माध्यम बन सकती हैं।

विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं की कमी, शिक्षकों की उपलब्धता, भवन निर्माण, विद्यार्थियों की उपस्थिति और शैक्षणिक गुणवत्ता जैसे विषयों के जरिए जनप्रतिनिधि शिक्षकों तथा विद्यालयों से जुड़े लोगों के संपर्क साध रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर सभी विधायकों से क्षेत्र में रहने एवं मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने की अपील की है।

शिक्षक मतदाताओं के बीच पकड़ बनाने की चुनौती

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनावी समीकरण केवल राजनीतिक दलों के समर्थन से तय नहीं होते। उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, शिक्षकों के बीच सक्रियता, उनकी समस्याओं पर उठाए गए कदम एवं संगठनात्मक संपर्क भी महत्वपूर्ण होते हैं।

ऐसे में विधायक विद्यालय प्रबंधन समितियों के माध्यम से चुनावी नयै के खेवयै बन सकते हैं। वहीं, चुनावी रणनीति के तहत शिक्षकों से संपर्क बनाने की कोशिशों के बीच यह भी महत्वपूर्ण होगा कि विद्यालयों की समितियां अपने शैक्षणिक दायित्वों पर केंद्रित रहें।

शिक्षक मतदाताओं का समर्थन हासिल करने के लिए जनप्रतिनिधियों को शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षकों की वास्तविक समस्याओं के समाधान पर ठोस पहल चुनौती बन सकती है। स्थानीय स्तर पर कई विधायकों के विरुद्ध शिक्षकों में नाराजगी भी है। हालांकि वे खुलकर इसे प्रकट नहीं कर रहे हैं।

कहां-कहां होना है चुनाव

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र

• पटना स्नातक
• दरभंगा स्नातक
• तिरहुत स्नातक
• कोसी स्नातक

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र 

• पटना शिक्षक
• दरभंगा शिक्षक
• तिरहुत शिक्षक
• सारण शिक्षक