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बिहार MLC चुनाव: जन सुराज की एंट्री और कांग्रेस की नाराजगी से बिगड़े समीकरण, कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला

Published: Mon, 21 Sep 2026 02:00 AM (IST)

बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों और गठबंधनों में बेचैनी है, जहां नवंबर में रिक्त होने वाली आठ सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना है।

बिहार विधान परिषद चुनाव।

बिहार विधान परिषद चुनाव।

HighLights

  1. नवंबर में रिक्त होने वाली आठ सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष।

  2. राजद के एकतरफा फैसलों से महागठबंधन में खलबली।

  3. जन सुराज पार्टी की एंट्री ने बिगाड़े समीकरण।

राज्य ब्यूरो, पटना। हर चुनाव के साथ राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ जाती है, लेकिन विधान परिषद का यह चुनाव कुछ अधिक बेचैन किए हुए है। यह बेचैनी गठबंधनों के साथ पार्टियों और प्रत्याशियों के स्तर तक है।

ऐसे में चुनाव की तिथि तक कुछ उठापटक हो जाए, तो अप्रत्याशित नहीं। नवंबर में आठ सीटें (शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चार-चार) रिक्त होनी हैं।

इस बार उनमें से अधिसंख्य सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति बन रही और कहीं-कहीं चतुष्कोणीय भी। ऐसा कांग्रेस की नाराजगी और मजबूत निर्दलीय प्रत्याशी की उपस्थिति से होगा। पिछली बार तक, एक-दो सीटों को छोड़, आमने-सामने का मुकाबला रहा है।

जदयू विधान पार्षद नीरज कुमार और विधायक अनंत सिंह की जुबानी जंग से पटना स्नातक सीट अभी सबसे अधिक चर्चा में है। यहां जन सुराज पार्टी (जसुपा) ने अनंत के चेहते अनुज कुमार सिंह को मैदान में उतार दिया है।

मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। इस त्रिकोण में अगर कांग्रेस ने टांग अड़ाई तो मुकाबला और रोचक होगा। कांग्रेस की पीड़ा राजद से है, जिसने एकतरफा निर्णय लेते हुए छह सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है।

सहयोगियों के लिए उसने शिक्षक कोटे की दो सीटें छोड़ी हैं, जहां से अभी कांग्रेस के डा. मदन मोहन झा और भाकपा के संजय कुमार सिंह विधान पार्षद हैं।

शिक्षक कोटे की सारण सीट से भाकपा हमेशा ताल ठोकती रही है। इस बार वहां भी राजद ने अपना प्रत्याशी उतार दिया है। महागठबंधन में खलबली मची हुई है। अंदरखाने कांग्रेस सभी सीटों के लिए तैयारी कर रही। अगर शीर्ष नेतृत्व का हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो संभवत: महागठबंधन की ताबूत में यह आखिरी कील हो।

शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से एनडीए और महागठबंधन का ही दबदबा रहता आया है। घटक पांच दलों के हवाले से बिहार में एनडीए को अब एक नई संज्ञा (पांच पांडव) भी मिल गई है।

इस चुनाव को अगर द्रौपदी मानें, तो सभी साधिकार हैं। रिक्त होने वाली सीटों में भाजपा की दो और जदयू की एक है। जदयू के चार प्रत्याशी लगभग तय हैं। बची सीटों से किसकी अरमान पूरी होगी और किसका दिल टूटेगा, यह मायने का होगा।

इसी आधार पर एक-दूसरे के लिए पसीना या आंसू बहाया जाएगा। हालांकि, जसुपा के लिए अभी ऐसी दिक्कत नहीं। गंवाने के लिए उसके पास एकमात्र सारण स्नातक की सीट है, जहां से पिछली बार आफाक अहमद विजयी रहे थे। राजद के लिए तो पूरा मैदान ही खुला है, क्योंकि इन आठ में से एक भी सीट उसके खाते की नहीं।

जीत-हार का आधार

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षक और स्नातक सीटों पर जीत का अंतर बेहद कम होता है। ऐसे में जसुपा की एंट्री स्थापित दलों (राजद और जदयू) का खेल बिगाड़ सकती है। चुनाव में मात्र सामाजिक समीकरण ही नहीं, बल्कि प्रत्याशियों का व्यक्तिगत प्रभाव और प्रबुद्ध वर्ग के बीच उनकी छवि ही जीत-हार का आधार बनेगी।

मजबूती और कमजोरी

  • एनडीए : शिक्षकों की नियुक्ति और सरकारी कर्मियों के लिए होने वाली पहल से चुनावी लाभ की अपेक्षा है। पटना और आसपास के प्रबुद्ध क्षेत्रों में जदयू और भाजपा का पुराना दबदबा रहा है। हालांकि, गुटबाजी और अंदरुनी कलह सतह पर आ गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर-लीक और स्थानांतरण नीतियों को लेकर युवाओं और शिक्षकों में नाराजगी भी है। हालांकि, कैडर वोट और चुनावी प्रबंधन में भाजपा-जदयू का कोई जोड़ नहीं।
  • महागठबंधन : राजद और वाम दलों के पास निष्ठावान कार्यकर्ताओं का नेटवर्क है। शिक्षकों के नियोजन और वेतन से जुड़े मुद्दों पर सरकार के विरुद्ध नाराजगी को भुनाने में वे आगे भी रहे हैं। माय (मुसलमान-यादव) समीकरण को राजद का कोर वोटर माना जाता है, जबकि स्नातक और शिक्षक सीटों पर प्रबुद्ध और मध्यम वर्ग का बोलबाला अधिक होता है। प्रबुद्ध वर्ग का आकर्षण वाम दलों के प्रति कम हुआ है और कांग्रेस निर्जीव-सी है।
  • जसुपा : स्नातक और शिक्षक सीटों के मतदाता बेहद जागरूक होते हैं। जसुपा का ''राइट टू एजुकेशन'' और ''सही लोग'' का नैरेटिव इस वर्ग को भा सकता है। प्रशांत किशोर का स्वयं का चुनावी प्रबंधन तगड़ा है। उसके सहारे पार्टी सूक्ष्म स्तर पर वोटर्स तक पहुंच बना रही है। हालांकि, मुख्यधारा की पार्टियों की तुलना में कैडर अभी नया है। हाल-फिलहाल कुछ पुराने चेहरों के टूटने और अन्य दलों में जाने से संगठनात्मक स्तर पर थोड़ी अस्थिरता है।

राजद के प्रत्याशी

  • पटना शिक्षक : डॉ. संजीव कुमार सिंह 
  • सारण शिक्षक : प्रो. जयराम यादव
  • पटना स्नातक : दिलीप कुमार
  • कोसी स्नातक : नितेश कुमार
  • दरभंगा स्नातक : अनिल कुमार झा
  • तिरहुत स्नातक : डॉ. रश्मि विनायक गौतम

जसुपा के प्रत्याशी

  • सारण शिक्षक : आफाक अहमद
  • पटना शिक्षक : दिव्या ज्योति
  • दरभंगा शिक्षक : सुरेश प्रसाद राय
  • दरभंगा स्नातक : रवीन्द्र यादव
  • कोसी स्नातक : रजनीश रंजन

जदयू के प्रत्याशी (संभावित)

  • दरभंगा शिक्षक : दिलीप चौधरी
  • सारण शिक्षक : आनंद पुष्कर
  • पटना स्नातक : नीरज कुमार
  • तिरहुत स्नातक : अभिषेक झा

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