बिहार में अपने ही विधायक और MLC की लड़ाई में फंसी JDU, ललन सिंह की एंट्री से निकल सकता है समाधान
जदयू अपने ही विधायक अनंत सिंह और विधान पार्षद नीरज कुमार के बीच चल रही लड़ाई से असमंजस में है, ...और पढ़ें

अनंत सिंह ने बढ़ाई JDU की टेंशन। फोटो जागरण
HighLights
जदयू विधायक अनंत सिंह और एमएलसी नीरज कुमार के बीच गहरा विवाद।
पटना स्नातक चुनाव में अनंत सिंह ने नीरज को सीधी चुनौती दी।
पार्टी वरिष्ठ नेता ललन सिंह के हस्तक्षेप का बेसब्री से इंतजार।
राज्य ब्यूरो, पटना। अपने एक विधायक और विधान पार्षद की लड़ाई को लेकर जदयू असमंजस में है। वह इसे सुलझा नहीं पा रहा है। विधायक अनंत सिंह हैं। विधान परिषद के सदस्य हैं-नीरज कुमार।
विधायक ने कसम उठा ली है-नीरज की जमानत जब्त करा देंगे। विधान परिषद सदस्य ने चुनौती दे दी है-पहले हिंदी में जमानत लिखना सीख लें।
दोनों के बीच लड़ाई पुरानी है। अनंत सिंह इस समय मोकामा से जदयू के विधायक हैं। वे पहले भी जदयू के विधायक रहे हैं। 2015 में मोकामा से जदयू ने नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था। तब अनंत निर्दलीय जीते थे।
2020 में वे राजद टिकट पर विधायक बने थे। 2022 में अनंत को एक मामले में सजा हो गई। सदस्यता रद होने के बाद हुए उप चुनाव में उनकी पत्नी राजद की विधायक बनीं। 2025 में अनंत बरी हो गए। जदयू के विधायक बने।
अनंत सिंह को नीरज से खुन्नस 2025 के विधानसभा चुनाव के समय से है। नीरज ने उनके लिए वोट नहीं मांगा था। विधायक का आरोप है कि उन्होंने विरोध किया था। इसी आधार पर अनंत सिंह ने घोषणा कर दी कि वे पटना स्नातक क्षेत्र के चुनाव में नीरज की जमानत जब्त करा देंगे।
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से नीरज लगातार चौथी जीत के लिए लड़ेंगे। चुनाव अक्टूबर में है। अनंत का कहना है कि यह चुनाव दलगत स्तर पर नहीं होता है। हम किसी निर्दलीय का समर्थन करते हैं, तो यह जदयू का विरोध नहीं होगा।
सच क्या है?
बेशक विधान परिषद की सदस्यता के लिए शिक्षक, स्नातक और स्थानीय निकाय क्षेत्रों से होने वाले चुनावों के मतपत्र पर दल का चुनाव चिन्ह नहीं होता है, लेकिन सभी दल अपने अधिकृत उम्मीदवारों के नाम जारी करते हैं। उनके पक्ष में वोट की अपील करते हैं।
चुनाव जीतने के बाद विधान परिषद में वे उसी दल के सदस्य होते हैं। जदयू नेतृत्व इसमें केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह के हस्तक्षेप की प्रतीक्षा कर रहा है। माना जाता है कि उनके हस्तक्षेप के बाद अनंत सिंह के रूख में बदलाव आ जाएगा।
कितने जिले हैं?
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पटना, नालंदा और नवादा जिले के स्नातक मतदाता वोट देते हैं। हरेक चुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण होता है। इस समय वोटरों की संख्या 85 हजार से अधिक है।
वोटरों में भूमिहार, कुर्मी, अत्यंत पिछड़ों और पिछड़ों की बहुलता है। अनंत सिंह विवाद के बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने जदयू का मोर्चा संभाल लिया है।
उन्होंने नालंदा जिले के अपने इकलौते सांसद और सभी विधायकों-विधान परिषद सदस्यों की बैठक की थी। उनकी सक्रियता का लाभ नीरज को मिल रहा है।
वैसे, अगर अनंत सिंह निर्दलीय उम्मीदवार अनुज सिंह के पक्ष में डटे रहते हैं, तो मुकाबला आमने-सामने का होगा। यह चुनाव अनंत बनाम नीरज की लड़ाई में बदल सकता है। राजद ने पटना स्नातक क्षेत्र से दिलीप कुमार को उम्मीदवार बनाया है। वे कुर्मी हैं। नालंदा के हैं।
