पटना, अरविंद शर्मा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पक्ष में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बयान का असर सिर्फ राजग पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि महागठबंधन के घटक दलों को भी इससे गहरा धक्का लगा है। खासकर उन्हें, जो विधानसभा चुनाव से पहले बिहार में तीसरा कोण बनने का इंतजार कर रहे थे। इसी आधार पर दबाव की राजनीति करने में भी जुटे थे। ऐसे दल उपचुनाव में पसंदीदा सीटों पर प्रत्याशी उतारकर विपक्षी एकता को झटका भी दे चुके हैं। अब अमित शाह के बयान ने उन्हें निराश किया है और अगली रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए बाध्य भी किया है। 

भाजपा के पैंतरे ने कर दिया गड्डमड्ड

भाजपा के नए पैंतरे ने महागठबंधन की सियासत को गड्डमड्ड कर दिया है। खुद राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने भी विपक्ष को दिशाहीन करार दिया है और स्वीकार किया है कि इसके चलते वोटों के गणित में राजग फिलहाल आगे दिख रहा है।

21 अक्‍टूबर को होगी बैठक

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रवक्ता दानिश रिजवान भी मानते हैं कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त करके अमित शाह ने विपक्ष को चुनाव से पहले ही सतर्क कर दिया है। भाजपा-जदयू की एकजुटता से संबंधित अमित शाह की ताजा अभिव्यक्ति के बाद महागठबंधन के पांचों घटक दल चुनाव प्रचार अभियान से मुक्त होकर 21 अक्टूबर के बाद बैठक करने वाले हैं।

बैठक में होगी कारणों की तलाश

इस दौरान उन सभी कारणों की तलाश होगी, जिसके चलते साथी दलों के रास्ते उपचुनाव के पहले ही अलग-अलग हो गए हैं। क्यों साथ होकर चुनाव नहीं लड़ पाए। क्या दिक्कत हो गई। सभी बातों पर चर्चा होगी। अभी तक राजद-कांग्रेस के साथ महागठबंधन के अन्य दलों को लग रहा था कि भाजपा और जदयू का गठबंधन बस टूटने वाला है, लेकिन भाजपा अध्यक्ष के बयान ने सारा गणित उलट डाला।  

विपक्ष को मिला है तैयारी का मौका 

कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी भाजपा अध्यक्ष के बयान को विपक्ष की राजनीति के हक में मानते हैं। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव में अभी बहुत समय है। अमित शाह के नए कार्ड से इतना साफ हो गया है कि बिहार में फिर आमने-सामने की ही टक्कर होगी। 

Posted By: Rajesh Thakur

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप