एक तिहाई कीमत पर रजिस्ट्री, 100 साल पुराने फर्जी कागज पर म्यूटेशन; बिहार में जमीन माफिया के खेल की परतें खुलीं
बिहार में जमीन माफिया भूमि सुधार, राजस्व और निबंधन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से रजिस्ट्री और म्यूटेशन में बड़े पैमाने पर धांधली कर रहे हैं।

बिहार में जमीन माफिया खेल रहे डबल गेम। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
जमीन माफिया सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से कर रहे धांधली।
फर्जी दस्तावेजों और कम कीमत पर रजिस्ट्री से राजस्व चोरी।
जमुई, मुजफ्फरपुर, नालंदा में कई बड़े मामले सामने आए।
राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य में जमीन माफिया भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग और निबंधन विभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मियों से सांठ-गांठ कर रजिस्ट्री से लेकर म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) तक खेल कर रहे हैं।
एक ओर जमीन माफिया एक तिहाई या आधी कीमत पर जमीन की रजिस्ट्री करा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सौ साल तक पुराने फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीन पर अवैध कब्जा कर रहे हैं।
बिहार पुलिस की जांच में जमुई, मुजफ्फरपुर, नालंदा, पटना समेत कई जिलों में एक के बाद एक, इससे जुड़ीं शिकायतें मिली हैं।
सरकारी कर्मियों की संदिग्ध भूमिका की जांच
राज्य में एक दर्जन से अधिक ऐसे और अंचल हैं जहां निबंधन से लेकर दाखिल-खारिज तक सरकारी कर्मियों की संदिग्ध भूमिका की जांच की जा रही है।
भूमि एवं राजस्व विभाग भी ईओयू के साथ मिलकर ऐसे दोषी पदाधिकारियों एवं कर्मियों की भूमिका की जांच कर रहा है। निबंधन विभाग भी रजिस्ट्री में राजस्व चोरी रोकने के लिए आंतरिक जांच और स्थल निरीक्षण करा रहा है।
ईओयू की जांच रिपोर्ट के अनुसार, जमुई में कृषि विभाग की दस एकड़ जमीन पर कब्जे के लिए अंचल कार्यालय के पदाधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत कर वर्ष 1924 और 1927 के फर्जी कागजात तैयार किए गए।
गुड्डू यादव गिरोह के सदस्यों के नाम पर दाखिल-खारिज
इसके बाद सरकारी जमीन को गुड्डू यादव गिरोह के सदस्यों के नाम पर दाखिल-खारिज दिखा दिया गया। इस मामले में कांड दर्ज कर तत्कालीन अंचल अधिकारी, कर्मचारियों और राजस्व अधिकारियों की भूमिका की भी जांच चल रही है।
पिछले साल मुजफ्फरपुर में भी 44 डिसमिल सरकारी कृषि भूमि के गलत तरीके से दाखिल-खारिज का मामला सामने आया था जिसके बाद तत्कालीन सीओ को निलंबित किया गया था।
पिछले माह ही कांटी और मुशहरी में भी राजस्व पदाधिकारियों एवं कर्मियों की संलिप्तता जमीन कब्जे के खेल में सामने आई है, जिसकी जांच अभी जारी है।
जून में नालंदा में संतोष डान के ठिकानों पर हुई छापेमारी में मिले अचल संपत्तियों के निबंधन और दखिल-खारिज में भी राजस्वकर्मियों एवं निबंधनकर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
14 करोड़ की जमीन, छह करोड़ कीमत दिखा रजिस्ट्री
ईओयू के अनुसार, जमुई में 14 करोड़ से अधिक सर्किल रेट वाली जमीन की रजिस्ट्री महज छह करोड़ की कीमत बताकर कर दी गई इससे सरकार को राजस्व क्षति हुई।
रिपोर्ट के अनुसार, गुड्डू यादव और उसकी पत्नी दुलारी देवी के नाम पर जमुई और सिकंदरा में 29 संपत्तियां दर्ज हैं। इनका निबंधन मूल्य महज 2.57 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है, जबकि सरकारी सर्किल रेट के अनुसार कीमत 7.59 करोड़ रुपये आंकी गई है।
इसी तरह गिरोह के अन्य सदस्यों के नाम पर 61 दस्तावेजों के माध्यम से 3.37 करोड़ रुपये का निवेश दिखाया गया है, जबकि सरकारी सर्किल रेट के अनुसार इनकी कीमत 6.65 करोड़ रुपये है। इन मामलों में निबंधकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
