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‘कमाई का जरिया बन गई शराबबंदी’; तेजस्वी का गंभीर आरोप मांझी ने भी मानी कमी, बताया कारण

Published: Fri, 03 Apr 2026 01:43 PM (IST)

Motihari Hooch Tragedy: मोतिहारी में जहरीली शराब से हुई मौतों पर विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ने सरकार पर सवाल ...और पढ़ें

तेजस्‍वी यादव और जीतन राम मांझी। फाइल

तेजस्‍वी यादव और जीतन राम मांझी। फाइल

HighLights

  1. मोतिहारी में जहरीली शराब से चार लोगों की मौत।

  2. तेजस्वी ने शराबबंदी कानून को कमाई का जरिया बताया।

  3. मांझी ने कानून के अनुपालन में कमी स्वीकार की।

राज्य ब्यूरो, पटना। राज्‍य में एक बार फिर जहरीली शराब से मौत का मामला सामने आया है। इस मामले में विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों की ओर से सरकार पर सवाल उठाए गए हैं।

नेता प्रत‍िपक्ष ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मोतिहारी में जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि छह लोगों की आंखों की रोशनी चली गई और कई अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है।

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि यह घटना एक बार फिर एनडीए सरकार के शराबबंदी कानून की विफलता और उसकी खामियों को उजागर करती है।

उन्होंने कहा कि यह पहली घटना नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक बिहार में 1300 से अधिक लोगों की मौत जहरीली शराब से हो चुकी है।

मूल उद्देश्‍य से भटक गया है कानून 

उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल सरकारी आंकड़े हैं, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। साथ ही, कई लोगों की आंखों की रोशनी भी चली गई है।

तेजस्वी ने आरोप लगाया कि शराबबंदी कानून अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका है और यह सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं, भ्रष्ट अधिकारियों तथा शराब माफिया के लिए कमाई का जरिया बन गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य में खुलेआम जहरीली शराब का निर्माण और बिक्री हो रही है तथा पुलिस की मिलीभगत से इसकी होम डिलीवरी तक की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार की नाक के नीचे यह सब हो रहा है और इसकी कीमत गरीब एवं आम लोग अपनी जान देकर चुका रहे हैं।

सही तरीके से नहीं हो रहा अनुपालन 

वहीं, सत्ता पक्ष के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून अपने आप में सही है, लेकिन इसके अनुपालन में कमी है।

मांझी ने कहा कि कानून को सफल बनाने की जिम्मेदारी सभी की है, लेकिन कहीं न कहीं हम सभी इसमें असफल रहे हैं, जिसके कारण कानून का अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहा है।