बिहार में ग्रीन हाइड्रोजन का प्लान, बरौनी रिफाइनरी-हिंदुस्तान उर्वरक जुड़ेंगे; 50 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य
बिहार कैबिनेट ने हरित हाइड्रोजन नीति के मसौदे को मंजूरी दी है, जिसका लक्ष्य 2030 तक राज्य में एक लाख ...और पढ़ें

सालाना एक लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य
HighLights
बिहार कैबिनेट ने हरित हाइड्रोजन नीति के मसौदे को दी मंजूरी।
बरौनी रिफाइनरी, हिंदुस्तान उर्वरक ग्रीन हाइड्रोजन से सीधे जुड़ेंगे।
निवेशकों को भूमि, जल, वित्तीय प्रोत्साहन, पूंजीगत लागत प्रतिपूर्ति मिलेगी।
भुवनेश्वर वात्स्यायन, पटना। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत वर्ष 2030 तक देश में पांच मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। इसी कड़ी में बिहार कैबिनेट ने एक दिन पहले बिहार हरित हाइड्रोजन नीति के प्रारूप को मंजूरी दी है। नई नीति के तहत राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने की तैयारी है।
बरौनी रिफाइनरी और हिंदुस्तान उर्वरक से सीधे जुड़ेगी नीति
बिहार की नई नीति में बरौनी रिफाइनरी और हिंदुस्तान उर्वरक व रसायन को ग्रीन हाइड्रोजन से सीधे जोड़ने की योजना है। ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल विशेष रूप से उर्वरक और रिफाइनरी उद्योग में किया जाता है। इसके अलावा भविष्य में भारी वाहनों, बसों, ट्रेनों और समुद्री जहाजों में इसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है।
सालाना एक लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य
बिहार में नई नीति के तहत प्रति वर्ष एक लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही राज्य में एक गीगावाट इलेक्ट्रोलाइजर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।
ग्रीन हाइड्रोजन के इस्तेमाल से ईंधन के रूप में मुख्य उत्सर्जन जलवाष्प होता है, इसलिए इसे स्वच्छ ऊर्जा के विकल्प के रूप में देखा जाता है।
अभी ब्रेडा होगी नोडल एजेंसी, आगे निगम बनाने की तैयारी
ग्रीन हाइड्रोजन नीति के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी फिलहाल ब्रेडा को नोडल एजेंसी बनाकर दी जाएगी। आने वाले समय में इस क्षेत्र के लिए अलग निगम बनाने की योजना है।
नीति में ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्यमियों और कंपनियों के लिए कई तरह की सुविधाओं और प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है।
गुजरात से लेकर गोरखपुर तक चल रहा ग्रीन हाइड्रोजन पर काम
ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में गुजरात में अदाणी समूह और एलएंडटी काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र लगाया गया है।
असम के जोरहट में भी ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट विकसित किए गए हैं।
सोलर के बाद नवीकरणीय ऊर्जा में बिहार का दूसरा बड़ा कदम
बिहार में अब तक नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मुख्य रूप से सोलर ऊर्जा पर काम हो रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन नीति लागू होने के बाद नवीकरणीय ऊर्जा का एक नया सेगमेंट राज्य में आगे आएगा।
देश में 2030 तक बिजली की 50 प्रतिशत मांग नवीकरणीय ऊर्जा से पूरी करने और कार्बन उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य भी तय किया गया है।
निवेशकों को जमीन-पानी से लेकर वित्तीय प्रोत्साहन तक
नई नीति में निवेशकों को जमीन और पानी की उपलब्धता में सहायता देने का प्रावधान है। ग्रीन इंडस्ट्री के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे।
इलेक्ट्रोलाइजर और भारी हाइड्रोजन वाहनों के विनिर्माण की पूंजीगत लागत में 10 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है।
हाइड्रोजन पालिसी के तहत सुविधाएं
- भूमि व पानी की उपलब्धता में सहायता ।
- ग्रीन इंडस्ट्री के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहन का प्राविधान।
- इलेक्ट्रोलाइजर और भारी हाइड्रोजन वाहनों के विनिर्माण के पूंजीगत लागत मं 10 प्रतिशत की प्रतिपूर्ति।
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