बिहार में अफसरों की मनमानी पर सरकार सख्त, विधानसभा-विधान परिषद की समितियों से दूरी पड़ेगी भारी; होगी कार्रवाई
बिहार सरकार ने विधानमंडल की समितियों की बैठकों से दूरी बनाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई का फैसला किया है। मुख्य ...और पढ़ें

बिहार विधानमंडल की समितियों की बैठक में उपस्थिति अनिवार्य। फाइल
HighLights
विधानमंडल समितियों की बैठकों से अधिकारियों की दूरी पर सरकार सख्त।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को कड़े निर्देश जारी किए।
निर्देशों का पालन न करने पर होगी प्रशासनिक कार्रवाई।
राज्य ब्यूरो, पटना। Bihar News: बिहार विधान मंडल की समितियों की बैठकों से दूरी बनाने वाले अधिकारियों पर अब कार्रवाई होगी।
बार-बार निर्देश के बावजूद विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव और अधीनस्थ निगमों के प्रबंध निदेशक समितियों की बैठकों में शामिल नहीं हो रहे हैं।
इसे सरकार ने गंभीरता से लिया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारियों को एक बार फिर कड़े निर्देश जारी किए हैं।
अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव से लेकर डीएम तक को हिदायत
इससे पहले मुख्य सचिव ने 25 मई को इस आशय का आदेश दिया था। संसदीय कार्य विभाग की जानकारी के अनुसार मुख्य सचिव अधिकारियों को पत्र भेज कहा है कि विधान मंडल के अंतर्गत गठित समितियों की बैठकों में विभागीय प्रधान की मौजूदगी सुनिश्चित होनी चाहिए।
अपरिहार्य स्थिति में ही उनका प्रतिनिधि बैठक में भेजा जा सकेगा। इसके लिए बैठक की तिथि से कम से कम एक सप्ताह पहले विधानसभा या विधान परिषद सचिवालय को कारण बताते हुए अनुरोध करना होगा।
प्रतिनिधि संयुक्त सचिव स्तर से नीचे का अधिकारी नहीं होगा। साथ ही वह संबंधित विषय की पूरी जानकारी रखने वाला विभागीय पदाधिकारी होना चाहिए।
कोषांग का किया जाएगा गठन
मुख्य सचिव ने सभी विभागों में विधान मंडल की विभिन्न समितियों से जुड़े मामलों पर कार्रवाई और अनुश्रवण के लिए विभागीय पदाधिकारी के अधीन एक कोषांग गठित करने का भी निर्देश दिया है।
समितियों की बैठकों में लिए गए निर्णयों के अनुपालन की भी नियमित निगरानी करनी होगी। सरकार ने साफ कर दिया है कि निर्देशों के अनुपालन में शिथिलता या उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
