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बिहार के सरकारी अस्पतालों में अब आयुर्वेद से भी होगा इलाज, मरीजों को मिलेंगी फ्री दवाएं

Published: Mon, 02 Mar 2026 12:35 PM (IST)

बिहार के सरकारी अस्पतालों में अब मरीजों को अंग्रेजी दवाओं के साथ आयुर्वेदिक और होमियोपैथिक दवाएं भी मिलेंगी। सरकार ने ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार के सरकारी अस्पतालों में जल्द ही मरीजों को अंग्रेजी दवाओं के साथ ही आयुर्वेदिक और होमियोपैथिक दवाएं भी मिलेंगी।

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक डॉक्टरों को प्रतिनियुक्त करने के बाद इन डॉक्टरों से इलाज कराने वाले मरीजों को संबंधित रोग की आयुर्वेदिक या होमियोपैथिक दवाएं मिल सकें, इसके लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।

दवाओं की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी बिहार स्वास्थ्य सेवाएं आधारभूत संरचना निगम को सौंपी गई है।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश में अमूमन सभी जिलों में स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं।

यहां निरंतर वैकल्पिक दवाइयों की सुविधाएं विकसित की जा रही है। पहले चरण में स्वास्थ्य केंद्रों में आयुष डॉक्टरों को प्रतिनियुक्त किया गया है। सरकार प्रयास कर रही है कि इन केंद्रों पर एलोपैथिक सेवाओं के साथ अब पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को भी सशक्त किया जाए।

इन केंद्रों पर काफी ऐसे मरीज आते हैं, जो एलोपैथिक की बजाय वैकल्पिक सेवाओं पर जोर देते हैं। लिहाजा विभाग ने अस्पतालों के प्रस्ताव और लोगों की बढ़ती मांग को देखते हुए संबंधित अस्पतालों में आयुर्वेदिक और होमियोपैथिक दवाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

स्वास्थ्य विभाग कर रहा तैयारी

अधिकारियों के अनुसार, दवाओं की खरीद, भंडारण और वितरण की समन्वित व्यवस्था तैयार की जा रही है, ताकि किसी भी स्तर पर कमी की स्थिति उत्पन्न न हो। वैकल्पिक मेडिसिन खरीद की जिम्मेदारी बिहार स्वास्थ्य सेवाएं आधारभूत संरचना निगम को सौंपा गया है।

सूत्रों ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्रों के साथ ही 294 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में भी होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक दवाओं का वितरण किया जाएगा। इन आरोग्य मंदिरों को प्राथमिक स्तर पर समग्र स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

सरकार का मानना है कि आयुर्वेद और होम्योपैथिक जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के मरीजों को वैकल्पिक उपचार की सुविधा स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगी। स्वास्थ्य विभाग के इस निर्णय से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में विविधता और पहुंच दोनों बढऩे की उम्मीद है।

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