राज्य ब्यूरो, पटनाः श्मशान और कब्रिस्तान की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर सरकार सख्त हुई है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामसूरत कुमार ने जिलाधिकारियों को कहा है कि वे इस विषय को गंभीरता से लें। प्राथमिकता के आधार पर इन दोनों स्थलों को मुक्त कराएं। उन्होंने कहा कि कोरोना ने श्मशान और कब्रिस्तान की जरूरत को नए सिरे से चिह्नित किया है। यह किसी और स्थल की तरह इंसान के लिए अनिवार्य है।

19 फरवरी को जिलाधिकारियों को लिखा था पत्र

मंत्री ने बताया कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस साल 19 फरवरी को जिलाधिकारियों को पत्र लिखा था। पत्र में कहा था कि अंतिम संस्कार वाले सभी स्थलों को अतिक्रमण मुक्त कराएं। इस पत्र के बाद अभियान चला। मुजफफरपुर सहित कुछ अन्य जिलों में कुछ स्थल मुक्त भी कराए गए। लेकिन, कोरोना संकट के कारण यह धीमा हो गया है। मंत्री ने जिलाधिकारियों से कहा कि इस मामले को भी वे कोरोना के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा मान कर काम करें।

सरकार का भी है कब्जा

मंत्री ने स्वीकार किया कि श्मशान और कब्रिस्तान की जमीन पर सिर्फ आम लोगों का ही कब्जा नहीं है। स्थानीय पदाधिकारियों के भ्रामक प्रतिवेदन के आधार पर सरकारी संरचनाओं का निर्माण भी कर लिया गया है। स्कूल, कुआं, धार्मिक स्थल, पावर सब स्टेशन, सिवेज एवं वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, सामुदायिक भवन और पंचायत सरकार भवन भी बनाए गए हैं। कुछ ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिनमें श्मशान की जमीन की बंदोबस्ती व्यक्तियों और परिवारों के नाम कर दी गई है।

दोषी पर होगी कार्रवाई

मंत्री ने कहा कि अतिक्रमण मुक्त करने के अलावा इसके लिए जिम्मेवार लोगों पर कार्रवाई भी होगी। गड़बड़ी करने वाले स्थानीय सरकारी पदाधिकारी भी दंडित होंगे। उन्होंने कहा कि कोरोना के चलते इस समय विभाग का काम अपनी गति से नहीं हो रहा है। ज्यादा काम आनलाइन हो रहा है। जबकि अतिक्रमण हटाने के लिए सरजमीन पर जाने की जरूरत होती है। कोरोना संकट समाप्त होने के तीन महीने के भीतर राज्य के सभी श्मशानों और कब्रिस्तानों को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कर दिया जाएगा।