पटना, सुनील राज। बिहार में 18 साल से अधिक उम्र के ज्यादा से ज्यादा लोगों का टीकाकरण हो सके, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग कई कदम उठा रहा है। इसी कड़ी में राज्य के वैसे नागरिक जिनके पास कोई पहचान पत्र नहीं है, उनके टीकाकरण के लिए टास्क फोर्स की मदद लेने का फैसला किया गया है। सरकार ने माना है कि प्रदेश में 18 से अधिक उम्र वालों में बड़ी संख्या में साधु-संत, जेल में बंद कैदी, मानसिक रोग संस्थानों में इलाज करवा रहे रोगी, सड़क किनारे रहने वाले भिखारी हैं।  समस्या यह है कि इनके पास खुद की पहचान बताने के लिए कोई प्रमाण नहीं है। ना ही इनके पास किसी प्रकार का कोई पहचान पत्र ही है। ऐसी स्थिति में ये लोग वैक्सीन से वंचित हो सकते हैं।

टास्‍क फोर्स करेगी ऐसी लोगों को चिह्न‍ित

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि ऐसे लोग सहजता से वैक्सीनेशन करा सकें और कोरोना से सुरक्षित हो सकें इसके लिए विभाग ने टास्क फोर्स की मदद लेने का आदेश जारी कर दिया है। जिलों में पूर्व से गठित टास्क फोर्स अपने-अपने जिले में 18 से ज्यादा उम्र के वैसे लोगों को चिह्नित करेगी जिनके पास कोई पहचान पत्र नहीं है।

अलग से टीकाकरण केंद्र बनाने की तैयारी

ऐसे लोगों की पहचान में दो बातें देखी जाएंगी कि कितनों के पास मोबाइल या ऐसी कोई दूसरी पहचान है और एक वैसे जिनके पास कुछ भी नहीं है। इनकी पहचान होने के बाद इनके लिए अलग से टीकाकरण केंद्र बनाए जाएंगे और समयबद्ध तरीके से इनका टीकाकरण कराया जाएगा। ऐसे समूह के लिए किसी भी प्रकार का पहचान पत्र अनिवार्य नहीं होगा। संबंधित टीकाकरण केंद्र पर इनके अलावा और किसी का टीकाकरण नहीं किया जाएगा। महत्वपूर्ण यह है कि यह सेवा केवल सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के कोविड टीकाकरण केंद्र पर ही उपलब्ध रहेगी।

  • जिनके पास पहचान पत्र नहीं, टास्क फोर्स की मदद से होगा उनका वैक्सीनेशन
  • साधु-संत, जेल में बंद कैदी, मानसिक रोगी, भिखारियों के टीकाकरण की पहल

इस समूह के लिए पहचान पत्र की अनिवार्यता नहीं रहेगी, अलग बनेगा केंद्र

टीकाकरण होने के बाद इस समूह को टीकाकरण केंद्र पर ही एक प्रमाण पत्र भी मुहैया कराया जाएगा जिसमें यह दर्ज होगा कि उनका टीकाकरण किया जा चुका है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस समूह के 18-44 वालों का टीकाकरण राज्य सरकार के स्रोत से प्राप्त वैक्सीन से और 45 से ज्यादा उम्र वालों का वैक्सीनेशन केंद्र की वैक्सीन से किया जाएगा।