बिहार में बाढ़ का कहर, गंडक का पानी घटा फिर भी खतरा बरकरार; सारण और पश्चिम चंपारण में तबाही
बाढ़ के दूसरे चरण में बिहार के सारण और पश्चिम चंपारण जिले सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं, जहाँ गंडक नदी का ...और पढ़ें

सारण में बाढ़ के बीच सुरक्षित स्थान की ओर जाते प्रभावित लोग। जागरण
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में आई दूसरे चरण की बाढ़ से अभी तक सर्वाधिक तबाही पश्चिम चंपारण एवं सारण जिले में हुई है।
गंडक नदी में अचानक आई फ्लैश फ्लड के बाद जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई है, लेकिन तटबंधों पर खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
रेवाघाट (सारण) में गंडक का जलस्तर उच्चतम स्तर से 71 सेंटीमीटर एवं लालगंज (वैशाली) में 32 सेंटीमीटर नीचे आया है।
संवेदनशील इलाकों में रात भर की जा रही पेट्रोलिंग
इसके बावजूद दोनों स्थानों पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से क्रमश: 0.56 मीटर एवं 2 मीटर ऊपर बना हुआ है।
इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने तटबंधों की निगरानी व संवेदनशील स्थानों पर रात में विशेष पेट्रोलिंग शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर सारण में दो हेलीकाॅप्टर के अतिरिक्त पांच जिलों से ट्रक से बाढ़ राहत सामग्री पहुंचाई जा रही।
24 घंटे पेट्रोलिंग के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं, ताकि तटबंधों पर होने वाले रिसाव, सीपेज, पाइपिंग, कटाव अथवा किसी अन्य क्षति की समय रहते पहचान कर तत्काल फ्लड फाइटिंग शुरू की जा सके।
विभागीय स्तर पर तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखें और किसी भी असामान्य स्थिति की सूचना मिलते ही आवश्यक बचाव कार्य शुरू करें।
गंडक के दोनों तटबंधों पर जल दबाव में आई कमी
गंडक के दोनों तटबंधों पर पानी के दबाव में कुछ कमी आई है और क्रिटिकल सीपेज एवं पाइपिंग की स्थिति भी पहले की तुलना में कम हुई है।
हालांकि, स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक निगरानी जारी रखने का निर्णय लिया गया है। तटबंधों के ब्रीच स्थलों पर पर्याप्त फ्लड फाइटिंग मटेरियल का स्टाक किया जा रहा है। साथ ही कट-एंड को सुरक्षित करने और टैगिंग का कार्य भी जारी है।
इधर, सारण जिले के पानापुर एवं मकेर प्रखंड में क्षतिग्रस्त तटबंधों से निकला पानी आसपास के विस्तृत क्षेत्र में फैल रहा है।
यह पानी पानापुर, करचौलिया, अमनौर, जगदीशपुर, मकेर और परसा होते हुए आगे बढ़ रहा है और दरियापुर प्रखंड के हरदिया चौर में एकत्रित होगा।
विभाग के मुताबिक, हरदिया चौर से अतिरिक्त पानी मुगल कैनाल के रास्ते गंगा नदी तथा नेउरा और काकरा नाला के माध्यम से गंडक नदी में प्रवाहित होगा।
वर्तमान आकलन के अनुसार संभावित अतिरिक्त जलप्लावन क्षेत्र करीब 22617 हेक्टेयर है। जल संसाधन विभाग ने तटबंधों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निगरानी और बचाव कार्यों में लगे कर्मियों को अलर्ट किया है।
रात में भी लगातार पेट्रोलिंग से संवेदनशील स्थलों पर संभावित रिसाव, कटाव और अन्य क्षति की समय रहते पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
40 हजार राशन पैकेट सारण भेजे गए
पटना से 10,000, सिवान से 15,000, भोजपुर से 5,000, बक्सर से 5,000 तथा वैशाली से 5,000 राशन पैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इस प्रकार विभिन्न जिलों से कुल 40,000 राशन पैकेट सारण भेजे गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वायुसेना के हेलीकाॅप्टर से 5000 से अधिक राशन पैकेट एयर ड्राॅप किए गए हैं।
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