नेपाल में बारिश से उफान पर बिहार की नदियां, 2 जिलों की 82000 आबादी बाढ़ से प्रभावित
नेपाल में हुई भारी बारिश के कारण बिहार के सीमावर्ती जिलों में प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ गया है।

समानों को सहेज कर नाव के सहारे सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी में लगे लोग। (जागरण)
HighLights
नेपाल में भारी बारिश से बिहार की नदियां उफान पर।
सुपौल और पश्चिम चंपारण में 82,000 लोग बाढ़ से प्रभावित।
राहत और बचाव कार्य के लिए टीमें तैनात, भोजन वितरण जारी।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में नेपाल के सीमावर्ती जिलों में पिछले तीन-चार दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण गंडक, कोसी, बागमती जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, उफनती नदियों के कारण निचले इलाकों में पानी फैल रहा है, जिससे वर्तमान में दो जिले (सुपौल एवं पश्चिम चंपारण) की लगभग 82 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। विभाग की ओर से स्थिति पर निरंतर और सतर्क निगरानी रखी जा रही है।
वाल्मीकिनगर बराज के पास गंडक का जलस्राव रविवार को 4,79,100 क्यूसेक दर्ज किया गया। इस वर्ष अब तक का अधिकतम जलस्राव है।
इसकी प्रवृत्ति अभी और बढ़ने की ओर है। वहीं, वीरपुर बराज के पास कोसी का जलस्राव 2,09,085 क्यूसेक दर्ज किया गया। वहीं, इंद्रपुरी बराज के पास सोन जलस्राव 52,840 क्यूसेक है और जलस्तर घटने की प्रवृत्ति में है।
दूसरी ओर, केंद्रीय जल आयोग के अनुसार डुमरिया घाट पर गंडक, बलतारा में कोसी, ढंग, सोनाखान, कटौझा एवं बेनीबाद में बागमती एवं गोवाबारी में लाल बकेया नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
बाढ़ की चपेट में 82000 लोग
आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सुपौल और पश्चिम चंपारण के कुल 11 प्रखंडों की 23 ग्राम पंचायतों में लगभग 82,000 लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन और लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए 173 नावों का परिचालन किया जा रहा है। साथ ही 13 सामुदायिक रसोई केंद्रों के माध्यम से अब तक लगभग 17,466 लोगों (थाली की संख्या) को खाना खिलाया जा चुका है।
विभाग ने बचाव और राहत कार्यों के लिए संवेदनशील जिलों में एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 10 टीमें लगा रखी है।
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