नेपाल के बाद अब बिहार में भी मंडरा रहा बाढ़ का खतरा, कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर
नेपाल में लगातार बारिश के कारण बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, जिससे कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

नगर के मंगलपुर में गंडक नदी का जलस्तर। (जागरण)
HighLights
नेपाल में भारी बारिश से बिहार में बाढ़ का संकट गहराया।
गंडक, गंगा, कोसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
प्रशासन ने निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
डिजिटल डेस्क, पटना। नेपाल के जललगोव (कैचमेंट एरिया) में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते बिहार में एक बार फिर बाढ़ का संकट गहराने लगा है। राज्य की कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे तटवर्ती इलाकों में दहशत का माहौल है।
जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, गंडक नदी का जलस्तर गोपालगंज में खतरे के निशान को पार कर गया है। वहीं, वाल्मीकिनगर बैराज से शनिवार रात 8 बजे करीब 99,800 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे निचले इलाकों में पानी फैलने की आशंका बढ़ गई है।
पटना से लेकर भागलपुर तक नदियां लाल निशान से ऊपर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल में हाल ही में हुए भूस्खलन और लगातार बारिश के कारण स्थिति बिगड़ी है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक और गंगा नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
- खगड़िया, कटिहार और कुरसेला में कोसी और बूढ़ी गंडक खतरे के निशान पर पहुंच चुकी हैं।
- राजधानी पटना के गांधी घाट और हाथीदह में गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
- भागलपुर के कहलगांव में भी गंगा नदी लाल निशान को पार कर चुकी है।
- प्रशासन अलर्ट, निचले इलाकों से निकाले जा रहे लोग
बाढ़ के खतरे को देखते हुए राज्य प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक निचले और जलमग्न क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
तटबंधों की सुरक्षा के लिए भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार और पश्चिम चंपारण जैसे संवेदनशील जिलों में बाढ़ नियंत्रण विभाग के इंजीनियर और अधिकारी कैंप कर रहे हैं। सभी जिलाधिकारियों को हालात पर खुद नजर रखने और 24 घंटे सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है।
(एजेंसी के इनपुट के साथ)
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