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बिहार में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत पैकेज: 8.27 लाख परिवारों के खाते में पहुंचे ₹579 करोड़

Published: Tue, 15 Sep 2026 05:16 PM (IST)

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में बाढ़ प्रभावित 8.27 लाख परिवारों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 579.23 ...और पढ़ें

खाते में नहीं पहुंची राहत तो एक सप्ताह में जुड़ेंगे नाम

खाते में नहीं पहुंची राहत तो एक सप्ताह में जुड़ेंगे नाम

HighLights

  1. मुख्यमंत्री ने 8.27 लाख बाढ़ प्रभावित परिवारों को 579 करोड़ रुपये दिए।

  2. प्रत्येक पात्र परिवार को डीबीटी के माध्यम से 7,000 रुपये की सहायता मिली।

  3. सरकार ने 'पहले से बेहतर' पुनर्निर्माण और पारदर्शिता पर जोर दिया।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए राज्य सरकार ने मंगलवार को बड़ी राहत की शुरुआत की। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 8 लाख 27 हजार 472 प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 579.23 करोड़ रुपये की आनुग्रहिक राहत राशि अंतरित की।

प्रत्येक पात्र परिवार को सात हजार रुपये की सहायता दी गई है। लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राहत वितरण का शुभारंभ किया।

सरकार ने स्पष्ट किया कि राहत पहुंचाने में पात्रता के आधार पर पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी। किसी भी पात्र परिवार को सरकारी सहायता से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।

बाढ़ ने 15 जिलों में मचाई तबाही, 50 लाख लोग प्रभावित

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 15 जिले, 88 प्रखंड, 575 ग्राम पंचायत और 2,642 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा 21 शहरों के 136 वार्ड भी बाढ़ की चपेट में आए हैं।

करीब 50 लाख लोगों पर बाढ़ का असर पड़ा है। लगभग 55 हजार हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है, जिससे फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।

सरकार की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में प्रभावित परिवारों की सहायता और सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

1,200 से ज्यादा सामुदायिक रसोई, अब तक परोसी गईं 1.28 करोड़ थालियां

बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए राज्य में 1,200 से अधिक सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इन रसोइयों के माध्यम से अब तक करीब 1.28 करोड़ थालियां परोसी जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित इलाकों में भोजन, पेयजल, दवा और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता लगातार बनी रहे।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 21 टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। उन्होंने कहा कि जब तक बाढ़ की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, राहत और सहायता का काम जारी रहेगा।

खाते में नहीं पहुंची राहत तो एक सप्ताह में जुड़ेंगे नाम

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि पात्र प्रभावित परिवारों की पहचान और सत्यापन में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।

यदि कोई पात्र परिवार राहत सूची से छूट गया है तो उसे एक सप्ताह के भीतर सूची में शामिल किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि कोई भी पात्र प्रभावित परिवार सरकारी राहत से वंचित नहीं रहना चाहिए।

राहत वितरण के साथ अब सरकार की नजर पुनर्प्राप्ति और पुनर्निर्माण पर है। कृषि निवेश अनुदान, सड़कों की मरम्मती और प्रभावित परिवारों-किसानों को आवश्यक सहायता देने का काम भी तेज किया जाएगा।

‘पहले से बेहतर’ बनेगा बाढ़ प्रभावित बिहार, एक महीने में पूरा होगा काम

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ‘Build Back Better Than Before’ की थीम पर पुनर्निर्माण करने का निर्देश दिया। यानी बाढ़ से प्रभावित इलाकों को सिर्फ पुराने स्वरूप में लौटाना नहीं, बल्कि पहले से बेहतर तरीके से तैयार करना है।

उन्होंने सभी पुनर्प्राप्ति कार्यों को एक महीने के भीतर पूरा करने को कहा। कृषि, सड़क और अन्य क्षेत्रों में हुए नुकसान का गंभीरता से आकलन कर प्रभावितों को नियमानुसार जल्द सहायता देने का निर्देश दिया गया है। सरकार का लक्ष्य राहत के साथ प्रभावित क्षेत्रों को जल्द सामान्य स्थिति में लाना है।

शिवराज चौहान के दौरे से पहले तैयार होगी नुकसान की पूरी रिपोर्ट

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रस्तावित दौरे को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ से हुए नुकसान का समुचित और तथ्यपरक आकलन कर रिपोर्ट तैयार रखी जाए।

प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान की वास्तविक स्थिति का दस्तावेजीकरण करने और जरूरी सहायता व पुनर्प्राप्ति कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभागों ने मिलकर राहत एवं बचाव कार्य में अच्छा काम किया है। सरकार का उद्देश्य केवल तत्काल राहत देना नहीं, बल्कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को जल्द सामान्य स्थिति में लाकर बेहतर तरीके से पुनर्निर्माण करना है।

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