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बिहार में नदी की गाद से बनेंगी सड़कें, नीतीश कुमार की पुरानी डिमांड पर केंद्र सरकार से बनी बात

Published: Wed, 04 Nov 2026 01:33 PM (IST)

बिहार सरकार और केंद्र के बीच नदियों की गाद का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने का समझौता ...और पढ़ें

नीतीश की पुरानी मांग को मिली नई रफ्तार

नीतीश की पुरानी मांग को मिली नई रफ्तार

HighLights

  1. केंद्र-राज्य समझौता: नदियों की गाद का उपयोग राजमार्ग निर्माण में।

  2. बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन में मिलेगी बड़ी मदद।

  3. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार की पुरानी मांग को सराहा।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में हर साल बाढ़ की समस्या से जूझने वाले लोगों के लिए नदियों की गाद अब परेशानी के साथ विकास का संसाधन भी बन सकती है। वर्षों से लंबित गाद प्रबंधन की मांग को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार और बिहार सरकार ने नदियों व जलस्रोतों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने और उसका उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में करने के लिए समझौता किया है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे बिहार के जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है। उन्होंने इस मांग को लंबे समय से उठाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बुधवार को मुलाकात भी की।

नीतीश की पुरानी मांग को मिली नई रफ्तार

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार लंबे समय से गाद प्रबंधन की जरूरत उठाते रहे हैं।

अब केंद्र के सहयोग से इस दिशा में ठोस पहल हुई है। दिल्ली में मंगलवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। 

नदियों से निकली गाद से बनेंगी राष्ट्रीय राजमार्ग की सड़कें

इस पहल के तहत 16 निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में करीब 243 लाख घनमीटर उपयुक्त गाद का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा 27 प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए 835 लाख घनमीटर गाद के उपयोग की योजना है। हालांकि, भविष्य की परियोजनाओं में इसका इस्तेमाल तकनीकी उपयुक्तता और जरूरी मंजूरी पर निर्भर करेगा। 

बाढ़ नियंत्रण के साथ खेती और जलस्रोतों को भी फायदा

नदियों, जलाशयों और अन्य जलस्रोतों में जमा गाद से उनकी जलवहन और जलधारण क्षमता प्रभावित होती है। वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने से जलप्रवाह और जलनिकासी में सुधार की उम्मीद है।

इससे बाढ़ के जोखिम को कम करने, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने और भूजल रिचार्ज में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक असर चयनित जलस्रोतों और काम के वैज्ञानिक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

पर्यावरण और नदी तटों की सुरक्षा का भी प्रावधान

समझौते के तहत गाद निकालने का काम तकनीकी जांच के बाद चिन्हित स्थानों पर ही किया जाएगा। निकाली गई सामग्री की गुणवत्ता जांचने के बाद ही उसे सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

नदी के पारिस्थितिकी तंत्र, तटबंधों, पुलों और दूसरे ढांचों को नुकसान से बचाने के लिए निगरानी और डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था भी रखी गई है। 

बिहार के विकास के लिए दोहरी उपयोगिता

इस पहल से एक ओर जलस्रोतों की सफाई और बाढ़ प्रबंधन को मजबूती मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर सड़क निर्माण के लिए मिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री की उपलब्धता बढ़ सकती है।

इससे कृषि भूमि की उपजाऊ मिट्टी पर निर्भरता कम करने और निर्माण लागत घटाने में भी मदद मिल सकती है। अब सबसे अहम चुनौती इस योजना को जमीन पर प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से लागू करने की होगी।

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