बिहार में 30 सीटों पर बेहद करीबी वोटों का गणित, सभी पर NDA की जीत; SIR पर महागठबंधन ने फिर खोला मोर्चा
महागठबंधन ने बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों और मतदाता-सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

एसआईआर को लेकर एक बार फिर मुखर हुए तेजस्वी यादव। फाइल
HighLights
महागठबंधन ने मतदाता सूची पुनरीक्षण पर लगाए गंभीर आरोप।
कई सीटों पर वोटों की संख्या में दिखी असामान्य समानता।
पोस्टल बैलेट और 'फैटम वोटों' से परिणाम बदलने का दावा।
विकाश चन्द्र पाण्डेय, पटना। सुधार की प्रक्रिया अगर पारदर्शिता के साथ हो तो विवाद और आरोप की गुंजाइश कम होती है।
इस पर निर्वाचन आयोग अब अमल कर रहा, लेकिन मतदाता-सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान उसने विरोधी बातों की तनिक कम परवाह की।
इस बहाने महागठबंधन ने फिर बखेड़ा खड़ा कर दिया है। एसआईआर को षड्यंत्र बताने के तर्क मेंं विधानसभा चुनाव के परिणाम की बखिया उधेड़ी जा रही।
21 भाजपा ने, आठ जदयू ने और एक लोजपा ने जीती लगभग बराबर वोटों वाली सीटों में से
विशेषकर उन 20 विधानसभा क्षेत्रों का उल्लेख हो रहा, जहां विजेताओं को लगभग मिलती-जुलती संख्या में वोट मिले। इनके अलावा 10 और सीटों पर वोटों का अंतर 10 से 15 का रहा। ये सारी सीटें एनडीए के खाते की हैं।
विधानसभा की कई सीटों पर बहुत कड़े मुकाबले हुए और वहां जीत-हार का अंतर बहुत कम रहा। महागठबंधन का आरोप है कि पोस्टल बैलेट में रद-ओ-बदल से भी परिणाम प्रभावित हुआ।
इसके साथ मतदान के आंकड़ों में गड़बड़झाला का आरोप है। हालांकि, इसका कोई साक्ष्य नहीं दिया जा रहा। अलबत्ता राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव एक बार फिर उन पुराने ऑडियो-वीडियो को साझा करने लगे हैं, जिनके जरिये एसआईआर के दौरान वे निर्वाचन आयोग पर संदेह जता चुके हैं।
SIR के जरिये वोटिंग पैटर्न में बदलाव का महागठबंधन ने लगाया आरोप
दरअसल, 20 सीटों पर विजेताओं को मिले मतों में शून्य से 9 वोटों का अंतर रहा। उनमें से 14 सीटें भाजपा ने, पांच जदयू ने और एक लोजपा-रामविलास ने जीती।
वोट बंटवारे की एकरूपता और इतने कम कम मतों का अंतर संदेह का आधार बन गया है। राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन का कहना है कि जिन सीटों पर जीत-हार का अंतर बहुत कम था, वहां मतदाता-सूची से असामान्य रूप से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए थे।
इससे वोटिंग का आम पैटर्न बदल गया। इसके अलावा कड़े मुकाबले वाली सीटों पर पोस्टल बैलेट में बदलाव कर जीत-हार की स्थिति बदली गई।
उदाहरण के लिए बाराचट्टी और इमामगंज हैं, जहां विजेता और निकटतम प्रतिद्वंद्वी के बीच पोस्टल बैलेट के मतों का अंतर बहुत कम रहा।
तीन मुख्य आरोप
- कड़े मुकाबले वाली सीटों से अधिक नाम हटाए गए
- मतदान के आंकड़े बढ़ाए गए
- पोस्टल बैलेट में बदलाव किया गया
फैटम वोटों ने बदला परिणाम
विधानसभा चुनाव दो चरणों में हुआ था। दूसरे चरण के मतदान की समाप्ति के बाद निर्वाचन आयोग ने कुल मतदान में 0.18% वृद्धि की घोषणा की।
इस फार्मूले से 1,34,145 वोट और जुड़ गए। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता असितनाथ तिवारी इसे फैटम वोट (अस्तित्वहीन वोट) बताते हैं। कहते हैं कि फैटम वोटों ने बहुत कम अंतर वाली सीटों के परिणाम बदल दिए।
लगभग बराबर वोट वाली सीटों की जोड़ियां
क्र. सं. | पहला क्षेत्र (विजेता) | प्राप्त वोट | दूसरा क्षेत्र (विजेता) | प्राप्त वोट | वोटों का अंतर |
|---|---|---|---|---|---|
1 | कुढ़नी (भाजपा) | 1,07,811 | राजगीर (जदयू) | 1,07,811 | 0 |
2 | कुम्हरार (भाजपा) | 1,00,485 | इस्लामपुर (जदयू) | 1,00,487 | 2 |
3 | शाहपुर (भाजपा) | 88,655 | बरौली (जदयू) | 88,657 | 2 |
4 | छातापुर (भाजपा) | 1,22,491 | बनमनखी (भाजपा) | 1,22,494 | 3 |
5 | तरारी (भाजपा) | 96,887 | गोपालगंज (भाजपा) | 96,892 | 5 |
6 | रून्नीसैदपुर (जदयू) | 93,672 | फुलपरास (जदयू) | 93,677 | 5 |
7 | पातेपुर (भाजपा) | 1,08,356 | राजनगर (भाजपा) | 1,08,362 | 6 |
8 | मुजफ्फरपुर (भाजपा) | 1,00,477 | कुम्हरार (भाजपा) | 1,00,485 | 8 |
9 | बरुराज (भाजपा) | 96,879 | तरारी (भाजपा) | 96,887 | 8 |
10 | चेनारी (लोजपा-रा) | 95,579 | बांका (भाजपा) | 95,588 | 9 |
माजरा इन 10 सीटों का
छतरपुर और तरारी (1,22,491 बनाम 1,22,480) के बीच मात्र 11 वोटों का अंतर रहा। अलीनगर और बक्सर (84,915 बनाम 84,901) में अंतर मात्र 14 वोटों का था।
वैशाली (जदयू) और राजनगर (भाजपा) के बीच 15 वोटों का अंतर था (1,08,377 बनाम 1,08,362)। बरूराज और हरसिद्धि (96,879 बनाम 96,864) के बीच 15 वोटों का अंतर था।
अलौली और नोखा में भी 15 वोटों का अंतर रहा। इन 10 सीटों में से सात पर भाजपा और तीन पर जदयू को जीत मिली।
