सड़कों पर बढ़ी सख्ती तो बदला रूट, अब ट्रेनों के जरिए ड्रग्स तस्करी; बिहार में उतारकर देशभर में होती है सप्लाई
सड़कों पर पुलिस की सख्ती बढ़ने के बाद ड्रग्स तस्करों ने अपना रास्ता बदल लिया है और अब लंबी दूरी ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
सड़कों पर सख्ती के बाद ड्रग्स तस्करों ने ट्रेनें चुनीं।
पूर्वोत्तर से दिल्ली तक लंबी दूरी की ट्रेनों का उपयोग।
महिलाओं और स्थानीय लोगों को कैरियर के रूप में इस्तेमाल।
जागरण संवाददाता, पटना। सड़कों पर पुलिस का शिकंजा कसा तो ड्रग्स तस्करों ने रास्ता बदल लिया। अब ट्रेनों को तस्करी का नया कारिडोर बनाया जा रहा है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट लंबी दूरी की ट्रेनों को तस्करी के रास्ते के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
कैरियर के तौर पर इसमें कुछ महिलाओं और स्थानीय लोगों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाल के दिनों में एसटीएफ और राजस्व खुफिया निदेशालय की कार्रवाई में तस्करों के साथ चार महिलाओं की गिरफ्तारी से इस नेटवर्क का नया चेहरा सामने आया है। इनमें एक नाइजीरियाई महिला भी शामिल है।
नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस में 29 किलो ड्रग्स
डीआरआइ पटना ने एक अगस्त को ट्रेन संख्या 12505 नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस के कोच एच-1 से नाइजीरियाई महिला को गिरफ्तार किया। डेल्टा स्टेट की रहने वाली महिला कामाख्या से आनंद विहार जा रही थी। उसके पास से 29 किलो एनडीपीएस पदार्थ मेथाक्वालोन बरामद हुआ।
जांच में सामने आया कि असम से महंगे सिंथेटिक ड्रग्स को बिहार के रास्ते दिल्ली पहुंचाया जा रहा था। तीन दिन पहले एसटीएफ नारकोटिक्स सेल को सूचना मिली थी कि तीन पुरुष और एक महिला असम से हेरोइन लेकर ट्रेन से आ रहे हैं। रेकी में पता चला कि वे टेकाबिगहा स्टेशन के पास चेन पुलिंग कर उतरेंगे।
घेराबंदी में चारों ग्रामीण रास्ते से एनएच की ओर जाते पकड़े गए। इनके पास से 99 ग्राम हेरोइन मिली। पूछताछ में पता चला गिरोह हर महीने दो-तीन बार असम के दिमापुर जाता था। वहां से हेरोइन खरीदकर वैशाली और फिर पटना पहुंचाई जाती थी। हर खेप में दो से ढाई लाख रुपये का फायदा होता था।
इसके पूर्व जक्कनपुर से एक महिला समेत चार तस्कर और कोतवाली थाना क्षेत्र के स्टेशन के पास एक तस्कर दंपती को भारी मात्रा में गांजा के साथ गिरफ्तार किया था।
कैरियर के जरिए म्यांमार-असम बेल्ट से ड्रग्स की खेप
एजेंसियां इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की धरपकड़ के लिए अब पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल से आने वाली ट्रेनों पर विशेष नजर रख रही हैं। सड़कों पर लगातार चेकिंग और चौकसी की वजह से अंतरराष्ट्रीय तस्कर सिंडिकेट ने तस्करी का रास्ता भी बदल दिया है। सड़क मार्ग के बजाय लंबी दूरी की ट्रेनों का इस्तेमाल कैरियर के रूप में कर रहा है।
तस्कर मुख्य रूप से तस्करी के चेन से जुड़े स्थानीय लोगों को कैरियर के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि सुरक्षा एजेंसी की आंखों में धूल झोंकी जा सके।
यह गिरोह पूर्वोत्तर के सीमावर्ती इलाकों या म्यांमार-असम बेल्ट से ड्रग्स की खेप प्राप्त कैरियर के जरिए कामाख्या या डिब्रूगढ़ से चलने वाली ट्रेनों को चुन रहा है।
पकड़े न जाएं, कई बार इसके लिए तस्कर बैग के निचले हिस्से, डबल लेयर ट्राली या खिलौनों और पैकेटों के भीतर कार्बन पेपर से कसकर ड्रग्स छिपाते हैं। ठिकाने तक पहुंचने के बाद स्थानीय पैडलर्स के जरिए सप्लाई करते हैं।
भारत-नेपाल सीमा से अफ्रीका तक कनेक्शन
कुछ माह पूर्व ही डीआरआइ एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ किया और 1.59 किलोग्राम कोकीन जब्त किया था। यह गिरोह भारत-नेपाल सीमा के रास्ते अफ्रीका से भारत में मादक पदार्थों और मनोरोगी पदार्थों (एनडीपीएस) की तस्करी करता था। इसके पूर्व जनवरी माह में गयाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 25 करोड़ की हाइड्रोपोनिक वीड्स (थाइलैंड का गांजा) के साथ पांच तस्कर पकड़े गए थे।
हाल की कार्रवाई
- एक अगस्त: नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस से 29 किलो एनडीपीएस के साथ विदेशी महिला गिरफ्तार।
- 22 अगस्त: जक्कनपुर में महिला समेत चार तस्कर 35 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार।
- तीन सितंबर: एसटीएफ-बख्तियारपुर पुलिस ने महिला समेत चार को 99 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा।
- पांच सितंबर: रूपसपुर में महिला 35 ग्राम हेरोइन और नकद के साथ गिरफ्तार
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