विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

निजी प्रैक्टिस रोक पर बंटे डॉक्टर: 'Optional System' और बेहतर सुविधाओं की उठी मांग, दबाव बढ़ा तो मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे खाली

Published: Sat, 11 Apr 2026 09:51 PM (IST)

Bihar Doctors Divided on Private Practice Ban: बिहार सरकार ने सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने का फैसला ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. सरकार के संकल्प के स्वागत के साथ-साथ विरोध भी, कहा आप्शनल रखने से होगा कल्याण

  2. करोड़ों खर्च कर कई बड़े चिकित्सा संस्थान हुआ है तैयार, दवाब हुआ तो खाली हो जाएंगे मेडिकल कॉलेज

  3. वर्ष 2001 में लागू हुआ था यह प्रविधान, 13 महीने में राज्य सरकार ने वापस लिए थे प्रविधान

जागरण संवाददाता, पटना। Bihar Doctors Optional System Demanded राज्य सरकार द्वारा सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के फैसले ने चिकित्सा जगत में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां इस निर्णय का स्वागत किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कई डॉक्टर संगठनों ने इसे ‘ऑप्शनल’ रखने और बेहतर सुविधाएं देने की मांग उठाई है।

सरकार का फैसला, NPA का प्रावधान

स्वास्थ्य विभाग के संकल्प के तहत बिहार स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा शिक्षा सेवा और Indira Gandhi Institute of Medical Sciences के डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। इसके बदले उन्हें नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) देने की बात कही गई है।

IMA ने जताई चिंता, ‘ऑप्शनल’ करने की मांग

Indian Medical Association के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सहजानंद प्रसाद सिंह ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इसे अनिवार्य बनाने के बजाय ‘ऑप्शनल’ रखा जाना चाहिए, ताकि डॉक्टरों के हित प्रभावित न हों।

‘दबाव बढ़ा तो मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे खाली’

चिकित्सकों का कहना है कि यदि यह निर्णय बाध्यकारी रूप से लागू किया गया, तो कई वरिष्ठ डॉक्टर मेडिकल कॉलेज छोड़ सकते हैं। इससे शिक्षण व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है।

2001 का उदाहरण, 13 महीने में वापस हुआ था फैसला

डॉक्टरों ने 2001 के उस फैसले की याद दिलाई, जब बिहार में निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाई गई थी, लेकिन 13 महीने के भीतर ही इसे वापस लेना पड़ा था। इस बार भी ऐसे ही हालात बनने की आशंका जताई जा रही है।

बेहतर सुविधाएं मिलीं तो स्वीकार्य हो सकता है फैसला

बिहार स्वास्थ्य सेवा एसोसिएशन के प्रवक्ता विनय कुमार ने कहा कि यदि Indira Gandhi Institute of Medical Sciences जैसी सुविधाएं सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराई जाएं, तो डॉक्टर इस व्यवस्था को स्वीकार कर सकते हैं।

निवेश और रोजगार पर भी असर की आशंका

कई डॉक्टरों ने निजी अस्पतालों में भारी निवेश किया है। ऐसे में अचानक प्रतिबंध से उनके साथ जुड़े कर्मचारियों और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।

कुछ संगठनों ने किया समर्थन, भत्ते बढ़ाने की मांग

वहीं, बिहार स्वास्थ्य सेवा एसोसिएशन के कुछ पदाधिकारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने 25 प्रतिशत NPA और ग्रामीण भत्ता लागू करने की मांग करते हुए इसे जनहित में बताया है।

सरकार बनाम डॉक्टर, आगे बढ़ सकती है टकराव की स्थिति

इस फैसले को लेकर डॉक्टरों के बीच मतभेद साफ दिख रहा है। यदि सरकार ने इसे बिना बदलाव लागू किया, तो आने वाले समय में स्वास्थ्य क्षेत्र में टकराव की स्थिति बन सकती है।

यह भी पढ़ें- सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक, नीतीश सरकार का बड़ा फैसला