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बिहार में आधी आबादी का खानपान 'लो-रिस्क': 49.3 प्रतिशत लोग ले रहे संतुलित आहार, डाइट स्क्रीनिंग में खुलासा

Published: Sun, 13 Sep 2026 08:49 PM (IST)

बिहार में हुए डाइट स्क्रीनिंग अभियान के तहत लगभग आधे (49.3%) नागरिकों का खानपान संतुलित पाया गया है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. लगभग आधे (49.3%) बिहारियों का खानपान संतुलित पाया गया।

  2. डाइट स्क्रीनिंग से पोषण का सटीक डेटा बैंक तैयार हुआ।

  3. पश्चिम चंपारण में सबसे सेहतमंद खानपान की आदतें मिलीं।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में हर दूसरा नागरिक यानी लगभग आधे (49.3%) लोग पूर्णतया ''''लो-रिस्क'''' यानी सुरक्षित और संतुलित खानपान की श्रेणी में पाए गए हैं।

यह परिणाम डाइट स्क्रीनिंग का है, जिसके अंतर्गत वैज्ञानिक पद्धति से खानपान की आदतों का आकलन हुआ। कुल 77194 नागरिकों की डाइट स्क्रीनिंग हुई। उनमें से 38,043 लो-रिस्क वाले रहे।

पूरे राज्य में दो से नौ सितंबर तक चलाए गए विशेष सघन अभियान के अंतर्गत 2524105 लोगों की स्वास्थ्य जांच हुई। सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ यह हुआ है कि स्वास्थ्य विभाग के पास अब जमीनी स्तर पर पोषण का सटीक डेटा बैंक तैयार हो चुका है।

अतिरिक्त पोषण सुधार की आवश्यकता वाले लोगों को समय रहते पहचान लिया गया है। अब आशा व एएनएम कार्यकर्ताओं के जरिए उन्हें उत्तम भोजन के लिए प्रेरित किया जाएगा।

डाइट असेंसमेंट में औरंगाबाद आगे 

घर-घर जाकर लोगों की खानपान की आदतों को डिजिटल चेकलिस्ट में दर्ज करने में औरंगाबाद जिला पूरे प्रदेश में सबसे आगे रहा। वहां 13070 नागरिकों की डाइट स्क्रीनिंग हुई। समस्तीपुर 9628 स्क्रीनिंग के साथ दूसरे स्थान पर रहा। सारण में 4391, नालंदा में 4151 और मधुबनी में 2992 लोगों का डाइट असेसमेंट हुआ।

पश्चिम चंपारण की थाली सबसे सेहतमंद 

खानपान की गुणवत्ता के मामले में पश्चिम चंपारण पूरे राज्य में आगे रहा। वहां 71.6% लोगों की खानपान आदतें पूरी तरह उत्तम पाई गईं। लखीसराय 69.5% के साथ दूसरे और भोजपुर 67.3% के साथ तीसरे पायदान पर रहा।

मुजफ्फरपुर में 65.1%, खगड़िया में 60%, बेगूसराय में 59.2%, मुंगेर में 58.7% और किशनगंज में 58.1% नागरिकों का आहार स्तर संतोषजनक रहा।

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