नवादा-नालंदा के गांवों में बैठकर देश भर के लोगों को बना रहे शिकार, 12 हजार म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई
बिहार के नवादा, नालंदा, पटना और शेखपुरा देश के टॉप-15 साइबर क्राइम हॉटस्पॉट में शामिल हैं, जहां से अपराधी देशभर में ठगी कर रहे हैं।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
नवादा, नालंदा, पटना, शेखपुरा देश के टॉप-15 साइबर हॉटस्पॉट में।
बिहार पुलिस ने फर्जी सिम, म्यूल खातों पर विशेष कार्रवाई।
साइबर अपराधी कई राज्यों से मिलकर ठगी का जाल फैला रहे।
कुमार रजत, पटना। साइबर अपराध के देश भर के टॉप-15 हॉट-स्पाट में बिहार के चार जिले शामिल हैं। इनमें नवादा दूसरे, नालंदा चौथे, पटना सातवें और शेखपुरा 15वें स्थान पर है।
साइबर अपराधी नवादा और नालंदा के गांवों में बैठकर देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। वहीं, साइबर ठगी की बड़ी राशि पटना में एटीएम के जरिए निकाली जा रही है।
बिहार पुलिस के साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (सीसीएसयू) की जांच में यह ट्रेंड सामने आया है। सीसीएसयू ने अब इन चार जिलों को फोकस करते हुए साइबर अपराधियों के विरुद्ध विशेष ऑपरेशन शुरू किया है।
इसके लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले फर्जी सिम एवं म्यूल खातों के विरुद्ध कार्रवाई कर रहा है।
सीसीएसयू ने अभी तक साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले 12 हजार से अधिक म्यूल खातों के विरुद्ध कार्रवाई की है, जिसमें सिर्फ इस साल पांच हजार से अधिक म्यूल खाते बंद कराए गए हैं।
दस दिनों में एक दर्जन फर्जी सिम विक्रेता गिरफ्तार
सीसीएसयू की टास्क फोर्स ने पिछले दस दिनों में ही नवादा, नालंदा, शेखपुरा और बांका में छापेमारी कर करीब एक दर्जन फर्जी सिम विक्रेता एवं एजेंटों को गिरफ्तार किया है।
इनके स्तर से जारी करीब 500 सिम कार्ड से देश भर में ढाई करोड़ से अधिक की वित्तीय ठगी किए जाने का भी पर्दाफाश किया गया है।
नालंदा से जारी 180 सिम कार्ड से 24 राज्यों में 65 लाख की साइबर ठगी, नवादा से जारी 99 सिमकार्ड से 79 लाख और शेखपुरा-नवादा से जारी 136 सिम कार्ड से एक करोड़ से अधिक की साइबर ठगी किए जाने का मामला सामने आया है।
पूर्व का सिम, पश्चिम से ठगी, दक्षिण में निकासी
साइबर अपराधी पुलिस को चकमा देने के लिए पूरी योजना से काम करते हैं। एक साइबर ठगी की घटना में तीन से चार राज्यों के लोकेशन शामिल होते हैं, जिससे पुलिस की जांच प्रभावित हो सके।
उदाहरण के लिए, बिहार में नवादा, नालंदा या शेखपुरा में बैठे साइबर ठग अधिसंख्य बंगाल और झारखंड से जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। यह सिमकार्ड जरूरतमंद ग्रामीणों की बायोमीट्रिक का गलत तरीके से इस्तेमाल कर जारी किए जाते हैं।
इसके बाद वह बिहार से बाहर दूसरे राज्यों के लोगों को काल कर ठगते हैं। ठगी की राशि किसी तीसरे राज्य के निवासी के म्यूल खातों में मंगाई जाती है।
साइबर ठगी की राशि को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग जगहों पर रहने वाले लोगों के म्यूल खातों में भेज दिया जाता है। ट्रेंड के अनुसार, साइबर ठग आधी से अधिक राशि क्रिप्टो करेंसी में बदल देते हैं।
इसके अलावा शेष राशि दूर-दराज के इलाकों के एटीएम या निकाली जाती है। कुछ राशि की आनलाइन शापिंग भी होती है। ऐसे में पुलिस जब इन मामलों की जांच संभालती है, तो एक ठगी में इतने लोकेशन और लोग शामिल होते हैं, कि जांच की गति प्रभावित हो जाती है।
