बिहार में साइबर ठगी के लिए ग्रामीणों का इस्तेमाल, हर रोज होता था लाखों का लेनदेन; सरपंच की तलाश तेज
साइबर ठगों ने ग्रामीणों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर तीन साल में 15 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन किया।

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
ग्रामीणों के फर्जी खातों से 15 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन।
जीविका से जुड़ी महिला सदस्य सीता कुमारी को पुलिस ने किया गिरफ्तार।
मास्टरमाइंड सरपंच संतोष मुखिया और आजाद अभी भी फरार हैं।
जागरण संवाददाता, पटना। ग्रामीणों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगी करने के मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि बीते तीन वर्षों के भीतर इन खातों में 15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंगाई गई।
साइबर ठगों द्वारा रोजाना लाखों रुपये के अवैध लेन-देन के लिए 500 से अधिक ग्रामीणों के खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस भारी-भरकम राशि के नेटवर्क का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस ने अपनी तफ्तीश तेज कर दी है।
मामले की जांच में जुटी साइबर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह की महिला सदस्य, बाढ़ के सलेमपुर निवासी सीता कुमारी को गिरफ्तार किया था।
आरोपित महिला संगठन जीविका से जुड़ी बताई जाती है। हालांकि, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड नालंदा जिले का सरपंच संतोष मुखिया और उसका मुख्य साथी आजाद फरार है।
अन्य राज्यों की पुलिस के पटना पहुंचने के बाद जब पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई, तब इस 15 करोड़ के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
साइबर थाना प्रभारी संगीता कुमारी के मुताबिक, आरोपियों के ठिकाने से 12 मोबाइल फोन, 13 सिम कार्ड, एक बायोमीट्रिक डिवाइस, 2 पासबुक, दो एटीएम और एक चेकबुक बरामद की गई थी।
पुलिस अब इन खातों में आए 15 करोड़ रुपये के ट्रांसफर ट्रेल और संदिग्ध बैंक मित्रों की भूमिका को खंगालने में जुटी है।
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