बैठक में खुद नहीं जा सकते तो 7 दिन पहले बताएं, बिहार के बड़े अफसरों को मुख्य सचिव की हिदायत
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बिहार के बड़े अधिकारियों को विधानमंडल की समितियों की बैठकों में गैर-हाजिरी पर कड़ी चेतावनी ...और पढ़ें

विधानमंडल की समितियों की बैठकों की अनदेखी करने वाले शीर्ष अधिकारियों पर होगी कार्रवाई।
HighLights
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को बैठकों में उपस्थिति पर चेताया।
गैर-हाजिरी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
सात दिन पहले सूचना या जानकार प्रतिनिधि भेजने का निर्देश।
राज्य ब्यूरो, पटना। विधानमंडल की समितयों की बैठकों से बड़े अधिकारियों की गैर-हाजिरी अब उन पर भारी पड़ेगी। ऐसी स्थिति में उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई भी होगी।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी विभागीय प्रधानों को पत्र लिखकर कहा है कि वे इसे गंभीरता से लें। अगर स्वयं बैठकों में नहीं जा सकते हैं कि इसकी सूचना बैठक से सात दिन पहले विधानमंडल के सचिवालय को दें।
अपने एवज में उन अधिकारियों को भेजें, जो संबंधित विषय के बारे में जानते हैं। बैठकों से गैर-हाजिर रहने वाले जिन अधिकारियों को कार्रवाई की चेतावनी दी गई है, उनमें अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारी शामिल हैं।
मुख्य सचिव ने अपर मुख्य सचिव से लेकर डीएम तक को लिखा पत्र
मुख्य सचिव ने यह पत्र विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. प्रेम कुमार की इस लगातार शिकायत के बाद जारी किया है, जिसमें कहा गया था कि समितियों की बैठक में विभागीय प्रधान नहीं आते हैं।
अपने एवज में ऐसे अधिकारियों को भेज देते हैं, जिन्हें विषय वस्तु की प्रारंभिक जानकारी भी नहीं रहती है। इसी तरह की शिकायत विधान परिषद की समितियों की भी रही है।
मुख्य सचिव से पहले संसदीय कार्य विभाग की ओर से भी इस आशय का पत्र विभागीय प्रधानाें को जारी किया गया था।
सरकारी निगम पर भी लागू
मुख्य सचिव के पत्र के दायरे में सरकारी बोर्ड और निगम के शीर्ष पदाधिकारियों को भी रखा गया है। शिकायत यह भी रही है कि बोर्ड-निगम के प्रबंध निदेशक स्तर के अधिकारी विधान मंडल की समितियों की बैठक में शामिल नहीं होते हैं। पत्र में उन्हें भी चेतावनी दी गई है।
लंबित मामलों का निबटारा
समितियों की यह स्थायी शिकायत बन चुकी है कि विभाग लंबित मामलों के निबटारे में रूचि नहीं दिखाते हैं। संसदीय कार्य विभाग की ओर से जारी पहले पत्र में यह हिदायत दी गई है कि हर स्तर के मामलों का समय-सीमा के भीतर निबटारा किया जाए।
पत्र में कहा गया है कि अगली बैठकों में अधिकारी जाएं तो यह विवरण लेकर जाएं कि सदन में दिए गए आश्वानों के कार्यान्वयन की क्या अद्यतन स्थिति है।
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