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बिहार में अब विधानमंडल की बैठकों से गायब नहीं रह पाएंगे अफसर, मुख्य सचिव ने जारी किया सख्त निर्देश

Published: Sat, 30 May 2026 09:44 PM (IST)

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने डीएम, प्रमंडलीय आयुक्तों और विभागाध्यक्षों को विधानमंडल की समितियों की बैठकों में अनिवार्य रूप से शामिल होने का सख्त निर्देश दिया है।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत। (फाइल फोटो)

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. डीएम, कमिश्नर, विभागाध्यक्षों की बैठक में उपस्थिति अनिवार्य।

  2. मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने जारी किए कड़े निर्देश।

  3. लोक लेखा समिति के मामले एक सप्ताह में निपटाएं।

राज्य ब्यूरो, पटना। विधानमंडल की समितियों की बैठकों में डीएम-प्रमंडलीय आयुक्त समते विभागों के प्रधानों को अनिवार्य रूप से शामिल होना होगा।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने इस संबंध में कड़ा निर्देश जारी किया है। सभी विभागों के अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों, प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को हर हाल में इसका अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

इसके साथ ही विधान मंडल की विभिन्न समितियों के पास लंबित पुराने मामलों को भी जल्द निष्पादित करने का निर्देश दिया गया है।

दरअसल, पिछले दिनों विधानसभा और विधानपरिषद में हुई बैठक के दौरान विभागीय प्रधान के उपिस्थत न होने का मामला सामने आया था जिसको लेकर नाराजगी भी जताई गई थी।

मुख्य सचिव ने इस प्रशासनिक ढिलाई पर नाराजगी जताते हुए नया निर्देश दिया है, ताकि जनता से जुड़े मामलों का जल्द निष्पादन हो सके।

मुख्य सचिव ने साफ कर दिया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कोई बहुत ही जरूरी या अपरिहार्य कारण आ जाए, जिसके चलते विभागीय प्रधान बैठक में नहीं आ सकते, तो उन्हें पहले से इसकी सूचना देनी होगी।

इसके साथ ही उन्हें अपने स्थान पर किसी ऐसे सक्षम अधिकारी को अधिकृत करके भेजना होगा जिसे उस विभाग की पूरी जानकारी हो।

एक सप्ताह में निपटाएं पीएसी के मामले

सबसे बड़ा बदलाव लोक लेखा समिति से जुड़े मामलों में किया गया है। महालेखाकार के प्रतिवेदनों की कंडिकाओं पर होने वाली कार्रवाई की धीमी रफ्तार पर चिंता जताते हुए इसमें तेजी लाने को कहा गया है।

बैठक की निर्धारित तिथि से ठीक एक सप्ताह पहले सभी संबंधित विभागों को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट की 30 प्रतियां निश्चित रूप से सभा सचिवालय को उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसका उद्देश्य है कि वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की समीक्षा समय पर हो सके।

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