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बिहार में कोर्ट के नकली आदेश से दाखिल-खारिज का फर्जीवाड़ा उजागर, प्राथमिकी का आदेश

Published: Sat, 30 May 2026 07:43 PM (IST)

Fake Court Order FIR: मोतिहारी सदर अंचल कार्यालय में फर्जी दस्तावेजों और नकली अदालती आदेशों के सहारे जमीन के दाखिल-खारिज ...और पढ़ें

हाईप्रोफाइल फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद हड़कंप । प्रतीकात्म्क फोटो

हाईप्रोफाइल फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद हड़कंप । प्रतीकात्म्क फोटो

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संवाद सहयोगी, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। Land Mutation Fraud Bihar: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से भूमि सुधार और राजस्व व्यवस्था को दागदार करने वाला एक बड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है।

मोतिहारी सदर अंचल कार्यालय में फर्जी दस्तावेजों और सीधे कोर्ट (न्यायालय) के ही नकली आदेशों के सहारे जमीन का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) कराने के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है।

इस हाईप्रोफाइल फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने का कड़ा आदेश जारी किया गया है।

डीसीएलआर के निरीक्षण में खुली पोल

भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) सदर प्रीति सिंह द्वारा शनिवार को मोतिहारी सदर अंचल कार्यालय का औचक निरीक्षण और भूमि दस्तावेजों का गहन सत्यापन किया जा रहा था। इसी रूटीन जांच के दौरान अंचल कार्यालय के भीतर चल रहे इस काले खेल की पोल खुली।

जांच में पाया गया कि कुछ रसूखदार भू-माफिया और बिचौलिए, अंचल के ही कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों के साथ साठगांठ कर अवैध रूप से जमीनों पर कब्जा दिलाने और अनुचित लाभ कमाने के चक्कर में थे।

कोर्ट के नाम पर ही जालसाजी

इस रैकेट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि जालसाजों ने सीधे न्यायालय के नाम पर ही फर्जीवाड़ा कर डाला। जांच में खुलासा हुआ कि खुद भूमि सुधार उप समाहर्ता (सदर), मोतिहारी के न्यायालय के नाम पर दो बिल्कुल फर्जी दाखिल-खारिज अपील वाद संख्या- 788/2023-24 और 789/2023-24 तैयार किए गए।

इतना ही नहीं, अंचल कर्मियों की मदद से इन जाली अदालती आदेशों को बकायदा बिहार सरकार के आधिकारिक ऑनलाइन सिस्टम पर भी अपलोड कर दिया गया, ताकि दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को अवैध रूप से पूरा किया जा सके।

अंचल कर्मी और बिचौलिए रडार पर

डीसीएलआर प्रीति सिंह ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए बताया कि इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल संबंधित आवेदकों, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया से जुड़े कथित बिचौलियों और अंचल कार्यालय के संदेहास्पद कर्मियों की भूमिका की बेहद बारीकी से जांच की जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि अभिलेखों और कोर्ट के आदेशों के साथ इस तरह की जालसाजी करना एक अत्यंत गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। इस गिरोह में शामिल किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या बाहरी माफिया को कतई बख्शा नहीं जाएगा।

सभी दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई और जेल भेजना सुनिश्चित किया जाएगा।