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अदालत का चक्कर काटना खत्म, अब होगी डिजिटल पेशी-गवाही; बिहार में 'न्यायश्रुति प्रणाली' का पहला ट्रायल सफल

Published: Sat, 18 Jul 2026 01:28 PM (GMT+05:30)

राज्य के न्यायालयों में पुलिस अधिकारियों, कैदियों और गवाहों की भौतिक उपस्थिति की आवश्यकता को समाप्त करने के लिए 'न्यायश्रुति' प्रणाली का सफल परीक्षण पटना में किया गया है।

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HighLights

  1. न्यायालयों में भौतिक उपस्थिति की आवश्यकता समाप्त होगी।

  2. लंबित मुकदमों का त्वरित निष्पादन संभव हो सकेगा।

  3. आम जनमानस को त्वरित एवं सुलभ न्याय मिलेगा।

राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य के न्यायालयों में जल्द ही पुलिस पदाधिकारियों, जेल के कैदियों, गवाहों और वैज्ञानिक विशेषज्ञों को भौतिक रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। वे सुरक्षित और प्रमाणित डिजिटल माध्यम से अपनी गवाही दर्ज करा सकेंगे।

इसके लिए न्यायश्रुति प्रणाली लांच की गई है, जिसके पायलट प्रोजेक्ट का पहला सफल माक ट्रायल शुक्रवार को हुआ। न्यायश्रुति प्रणाली लागू होने से लंबित मुकदमों का त्वरित निष्पादन कराया जा सकेगा।

साथ ही, आम जनमानस को त्वरित एवं सुलभ न्याय भी मिल सकेगा। इस विशेष ट्रायल के लिए पटना के जिला एवं अपर सत्र न्यायधीश-23 गौरव कुमार की अदालत के एक मामले को चयनित किया गया था।

इस संपूर्ण ट्रायल प्रक्रिया में आपराधिक न्याय प्रणाली के सभी स्तंभों जैसे-अभियोजन कार्यालय, पटना के बेउर स्थित आर्दश केंद्रीय कारा, पटना स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला को एक साथ जोड़कर न्यायश्रुति का ट्रायल किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा। पूरी ट्रायल प्रक्रिया का सफल संचालन एनआइसी के स्तर से किया गया।

गृह विभाग के अनुसार, इस सफल परीक्षण के बाद न्याश्रुति व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से राज्य के अन्य जिला अदालतों में भी पूरी तरह से लागू किया जाएगा। इसके लिए आधारभूत संरचना आदि से संबंधित इकाइयों को लैस किया जाएगा। न्यायश्रुति प्रणाली का मुख्य उद्देश्य अदालती कार्यवाही में होने वाले समय एवं संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है।

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