बांकीपुर उपचुनाव: RJD के फैसले से दो खेमे में बंटी कांग्रेस; सीनियर नेता के बयान से बढ़ी हलचल
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर कांग्रेस में मतभेद सामने आए हैं, क्योंकि राजद ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौर ने ऋषि मिश्रा के बयान से किया किनारा। फाइल
HighLights
राजद ने बांकीपुर उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किया।
कांग्रेस में उम्मीदवार न उतारने पर मतभेद उभरे।
ऋषि मिश्रा के बयान से कांग्रेस नेतृत्व ने दूरी बनाई।
राज्य ब्यूरो, पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर मतभेद दिख रहे हैं। राजद ने उम्मीदवार घोषित कर दिया है।
इसके बाद कांग्रेस के एक वर्ग ने जहां गठबंधन धर्म निभाने की बात कही है, वहीं दूसरा खेमा इस फैसले से असहमत नजर आ रहा है।
इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि बांकीपुर सीट को लेकर कांग्रेस के अंदर खींचतान तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने पहले पार्टी आलाकमान के समक्ष बांकीपुर सीट पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी।
राजद ने घोषित किया उम्मीदवार, तो फूटे विरोध के सुर
हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि आलाकमान गठबंधन के हित में फैसला करता है तो कांग्रेस दावेदारी छोड़ राजद को समर्थन देगी। राजद ने यहां से रेखा कुमारी को उम्मीदवार बनाया है।
इसके बाद कांग्रेस के भीतर विरोध का स्वर फूटा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ऋषि मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से कहा कि बांकीपुर में भाजपा को हराने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर एक साझा उम्मीदवार उतारना चाहिए था।
यदि जनसुराज के प्रशांत किशोर यहां से चुनाव लड़ रहे हैं, तो कांग्रेस और राजद के शीर्ष नेतृत्व को उनसे बातचीत करनी चाहिए और विपक्ष को मिलकर उनका सहयोग करना चाहिए।
पूर्व विधायक ऋषि मिश्रा के बयान से किनारा
मिश्रा के बयान के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने तुरंत उससे दूरी बना ली। मीडिया विभाग के अध्यक्ष राजेश राठौड़ ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह ऋषि मिश्रा की व्यक्तिगत राय है और इसका कांग्रेस के आधिकारिक निर्णय से कोई संबंध नहीं है।
हालांकि, पार्टी के भीतर नेतृत्व से असंतुष्ट माने जाने वाले कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक वर्ग ऋषि मिश्रा के समर्थन में आता दिखाई दे रहा है।
इससे यह चर्चा भी तेज हो गई है कि बांकीपुर सीट को लेकर कांग्रेस के अंदर दो अलग-अलग राय बन चुकी हैं। एक खेमा गठबंधन के फैसले के साथ खड़ा है, जबकि दूसरा मानता है कि कांग्रेस को अपनी दावेदारी छोड़नी नहीं चाहिए थी।
