'MP-MLA बनना आसान, PM-CM से भी ज्यादा पावरफुल हैं मुखिया'; ग्राम संसद में बोले CM सम्राट चौधरी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि मुखिया चुनाव विधायक-सांसद के चुनाव से अधिक चुनौतीपूर्ण होते हैं, क्योंकि इनमें जमीनी स्तर पर असली लोकतंत्र की परीक्षा होती है।

विधायक-सांसद से चुनौतीपूर्ण मुखिया चुनाव: मुख्यमंत्री
HighLights
मुखिया चुनाव विधायक-सांसद के चुनाव से अधिक चुनौतीपूर्ण होते हैं।
बिहार की पंचायतों को एक लाख करोड़ से अधिक का फंड।
सरकारी खरीद में स्थानीय बिहार निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता मिलेगी।
जागरण संवाददाता, पटना। होटल ताज में आयोजित "ग्राम संसद, बिहार चैप्टर-5 मुखिया संवाद" को संबोधित करते हुए सोमवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायत चुनावों की जटिलता का जिक्र करते हुए कहा कि सांसद या विधायक का चुनाव लड़ना आसान हो सकता है, लेकिन वार्ड या मुखिया का चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।
उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर के इन चुनावों में यह भी पता नहीं चलता कि सगा भाई या पट्टीदार किसे वोट दे रहा है; और यही हमारे लोकतंत्र की असली परीक्षा है।
पंचायती राज व्यवस्था की अहमियत को रेखांकित उन्होंने कहा कि आम धारणा है कि देश में पीएम, राज्य में सीएम और जिले में डीएम के पास सबसे अधिक शक्ति होती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि सबसे अधिक ताकत और कार्यभार एक मुखिया के पास ही होता है।
सीएम ने कहा कि ग्राम संसद के माध्यम से गांवों के विकास के लिए ठोस सुझाव सामने आने चाहिए।
पंचायतों में विकास कार्यों के लिए धन की कमी न होने का भरोसा दिलाते हुए सीएम ने कहा कि यह पैसा सीधे जनता के टैक्स से आता है। उन्होंने बताया कि 16वें वित्त आयोग के तहत भारत सरकार अगले पांच वर्षों में बिहार की पंचायतों को लगभग 52 हजार करोड़ रुपये देगी।
इसके अतिरिक्त, योजनाओं के तहत लगभग 47 हजार करोड़ रुपये मिलेंगे, जिसमें 40 प्रतिशत राशि राज्य और 60 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करेगी। कुल मिलाकर अगले पांच वर्षों में पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से विकास कार्यों पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बने उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी खरीद में स्थानीय उद्योग के उत्पादों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था की जाएगी। छड़, सीमेंट सहित बिहार में निर्मित उत्पादों की खरीद कम से कम 30 प्रतिशत करना होगा जिसे टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
उच्च शिक्षा व विधि मंत्री संजय सिंह टाइगर ने कहा कि देश एवं राज्य का विकास गांव से ही हो सकता है। इसके लिए नीति और नेतृत्व बेहतर होना चाहिए। सरकार से नागरिकों की साझेदारी होनी चाहिए। तकनीक के साथ वित्तीय प्रबंधन की क्षमता विकसित करनी होगी। हर गांव की आवश्यकता के हिसाब से योजना बनानी होगी। गांव के विकास से शहर का दबाव कम होगा।
खेल व उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि देश की समृद्धि की कल्पना बिहार के विकास के बिना नहीं की जा सकती। अपना प्रदेश कई विकसित राज्यों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। हमें बेहतर कल के लिए जनप्रतिनिधियों की नई छवि बनानी होगी। आने वाले समय में 10 हजार नए उद्योग राज्य में उतारने होंगे। युवाओं को यह बताने की जरूरत है कि वह भी उद्योग कर सकते हैं। इसके लिए सरकार सहयोग करेगी।
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि हमारी 85 प्रतिशत लोग गांव में बसते हैं। गांव के सहयोग के बिना मंत्रालय नहीं चल सकता। यह आयोजन तब सार्थक होगा, जब आगे की योजनाओं का खाका खींचा जाए। सबसे जरूरी यह है कि ग्राम सभा सही तरीके से हो। सभा होगी तो समस्या का समाधान निकलेगा।
विधान पार्षद व ग्राम संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय मयूख ने कहा कि राज्य के विकास के लिए जनता और सरकार को साथ-साथ चलना होगा।
पंचायतें मजबूत होंगी तो गांवों में विकास की रफ्तार बढ़ेगी
बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने पंचायत प्रतिनिधियों से गांवों को विकास की मजबूत इकाई बनाने तथा आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने कि राज्य के गांवों की ताकत ही बिहार के विकास की असली शक्ति है। जब पंचायतें मजबूत होंगी, गांवों में विकास की रफ्तार बढ़ेगी और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे, तभी विकसित बिहार का सपना जमीन पर साकार होगा।
उन्होंने कहा कि पंचायतों को विकास की मजबूत इकाई बनाकर आत्मनिर्भर गांव, सक्षम युवा और मजबूत स्थानीय लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
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