मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

पटना, जेएनएन। बिहार कैबिनेट की बैठक शुक्रवार को हुई। इसकी अध्‍यक्षता मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने की। बिहार कैबिनेट ने इस बैठक में 19 एजेंडों पर अपनी स्‍वीकृति दी है। इसमें बिहार के कई जिलों में पड़े सूखाड़ पर चर्चा हुई। इसके अलावा जलवायु के अनुरूप मॉडल गांवों के बनाये जाने के प्रस्‍ताव पर भी मुहर लगी। इसके तहत आठ जिलों के 40 गांवों को मॉडल गांव बनाया जाएगा।   

किसानों को मुआवजा के लिए 900 करोड़ का प्रावधान
बिहार के 18 जिलों के 102 प्रखंडों की 896 पंचातयों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। जिन प्रखंडों और उनके अंतर्गत आनेवाली पंचायतों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, वहां इस बार औसत से 30 प्रतिशत कम वर्षापात हुआ है। कम वर्षापात की वजह से संबंधित पंचायतों में खरीफ फसल का 70 प्रतिशत से कम आच्छादन हुआ है। इन 18 जिले के 102 प्रखंडों की 896 पंचायत के प्रत्येक परिवार को 'तत्काल सहायता' के रूप में तीन-तीन हजार रुपये दिए जाएंगे। इस कार्य में होने वाले खर्च के लिए बिहार आकस्मिकता निधि से 900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 

40 गांव जलवायु के अनुकूल बनेंगे मॉडल गांव 
राज्य सरकार ने बिहार के आठ जिलों के 40 गांवों को जलवायु के अनुकूल कृषि के लिए मॉडल गांव के रूप में विकसित करने का फैसला किया है। शुक्रवार को मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। कृषि विभाग के सचिव एन सरवन कुमार ने बताया मंत्रिमंडल ने जलवायु के अनुकूल कार्यक्रम के लिए 60.65 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस योजना के तहत दो किस्म की योजनाएं संचालित होंगी। पहली योजना के तहत वर्तमान में मौजूदा तकनीक को किसानों के खेत तक पहुंचाने से संबंधित है। इसमें कृषि यंत्र, फसल अवशेष प्रबंधन जैसे विषयों पर कार्य होगा। इसके तहत स्थानीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों के समक्ष आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए किसानों को सक्षम बनाने पर काम होगा। यह योजना बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया, कृषि विवि पूसा, बिहार कृषि विवि सबौर और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पूर्वी क्षेत्र के द्वारा कार्यान्वित की जाएगी। योजना के तहत आठ जिलों के 40 गांवों को जलवायु के अनुकूल कृषि के लिए मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जाएगा। इस योजना से किसान विपरीत परिस्थितियों में भी खेती करने में भी सक्षम हो सकेंगे। 

बाढ़ प्रभावित पंचायतों में योजना मान्य नहीं  
मंत्रिमंडल की बैठक के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि इस वर्ष अनियमित वर्षापात के कारण 18 जिलों की 896 पंचायतों में खरीफ फसल का 70 फीसद से कम आच्छादन हुआ है। उत्पन्न गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने तत्काल सहायता देने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि यह राशि आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रभावित परिवारों को मुहैया कराई जाएगी। परन्तु वैसी पंचायतों में जहां जुलाई महीने में बाढ़ आई थी उनके लिए यह योजना नहीं होगी। जिलाधिकारियों द्वारा प्रभावित पंचायतों की अनुमोदित सूची मिलने पर तीन-तीन हजार रुपये की सहायता राशि प्रत्येक परिवार के बैंक खाते में पीएफएमएस की जाएगी। 

15 अक्टूबर को रिपोर्ट पर शेष जिलों का फैसला  
प्रत्यय अमृत ने बताया कि आज मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि कृषि विभाग पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी 15 अक्टूबर 2019 की तिथि को आधार मानते हुए तीन प्रमुख बिंदुओं की जांच के बाद शेष प्रखंडों को सूखाग्रस्त घोषित करने अनुशंसा सरकार से करेगा। जिन तीन बिंदुओं पर जांच होनी है, उसमें खेती की गई जमीन में दरार उत्पन्न होना। फसलों के मुरझाने का प्रभाव तथा उपज में 33 प्रतिशत या इससे अधिक की कमी को देखा जाएगा। इसके आधार पर कृषि विभाग रिपोर्ट सरकार को देगा। रिपोर्ट के आधार पर शेष जिलों के प्रखंड-पंचायतों को सूखाग्रस्त घोषित किया जाएगा। प्रखंडों के नाम की घोषणा होने के बाद संबंधित प्रखंडों को फसलों की हुई क्षति के लिए किसानों को कृषि इनपुट सब्सिडी दी जाएगी। 

प्रभावित जिले प्रखंड और पंचायतें एक नजर में

जिला       प्रखंड       पंचायत

पटना        17          135

नालंदा      12           75

भोजपुर      2           14 

रोहतास      1            1 

गया         10          86

नवादा        9          118

औरंगाबाद   2           18

जहानाबाद   6            56

अरवल      2             8 

मुंगेर        4            18

जमुई        8            72

लखीसराय  5            64

शेखपुरा     4            33

भागलपुर    3            22

बांका       5            34

वैशाली    10           140

मुजफ्फरपुर  1            1

दरभंगा      1            1 

 

Posted By: Rajesh Thakur

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप