बिहार विधानसभा में पेश हुआ सरप्लस बजट, शिक्षा विभाग को मिला सबसे ज्यादा पैसा; देखें पूरा लेखा-जोखा
बिहार विधानसभा में 2026-27 का बजट पेश हुआ, जिसमें अगले पांच वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश का ...और पढ़ें


समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, पटना। विधानसभा में मंगलवार को पेश वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट आकार के लिहाज से भले ही बहुत बड़ा नजर नहीं आ रहा हो, फिर भी व्यय के विवरण की रूप रेखा राज्य के विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को जाहिर करती है।
उद्योग और रोजगार के भविष्य की अच्छी तस्वीर सरकार की इस घोषणा से साफ होती है कि आने वाले पांच वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बजट में महिलाओं और अति गरीबों को भी उज्ज्वल भविष्य का आश्वासन दिया गया है।

वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने अपने बजट भाषण में कहा है कि अति गरीब परिवारों को लघु उद्यमी योजना के तहत समृद्ध बनाया जाएगा। विधानसभा चुनाव में सरकार ने एक करोड़ 56 लाख महिलाओं के बीच 10-10 हजार रुपये का वितरण किया था।
किसी महिला के कारोबार में रूचि की पुष्टि होती है तो उन्हें और दो लाख रुपये दिए जाएंगे। सरकार ने इस योजना को बजट का हिस्सा बनाकर बता दिया कि पूंजी के अभाव में किसी महिला का उद्यमी बनने का सपना टूटेगा नहीं।
सात निश्चय के दो संस्करण के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सात निश्चय तीन की घोषणा की है। इसका सूत्र है-सबका सम्मान, जीवन आसान। बजट में इस सूत्र का पूरा ध्यान रखा गया है। समृद्धि से सम्मान बढ़ता है और जीवन के रास्ते भी आसान होते हैं।

सरकार ने सदन (विधान सभा व विधान परिषद) में भी सात निश्यच-3 से बिहार को समृद्धि के पथ पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई है। नए वित्तीय वर्ष (2026-27) से इससे जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन का क्रम शुरू होगा, ताकि अगले पांच वर्षों में प्रति व्यक्ति आय दोगुनी हो सके।

इस कड़ी में एक करोड़ नौकरी-रोजगार और महिलाओं को सशक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित हुआ है। कुछ नौकरियां सरकार देगी और कुछ निजी क्षेत्र से मिलेंगी।
नए कल-कारखानों की स्थापना के उद्देश्य से नीतियां बनाई जा चुकी हैं और अब सरकार अगले पांच वर्षों में 50 लाख करोड़ के निवेश के लिए उद्यमियों को रिझाने का पूरा प्रयत्न करेगी।

वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को सदन के पटल पर 2026-27 के लिए 347589.76 लाख करोड़ का बजट प्रस्ताव रखा। यह अब तक का सबसे बड़ा बजट है, जो 2025-26 की तुलना में 30694.74 करोड़ रुपये अधिक है।

इस बजटीय प्रविधान के साथ नए वित्तीय वर्ष में वर्तमान मूल्य पर बिहार की विकास दर 14.88 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। बजट आकार में हुई वृद्धि का मूल कारण स्थापना व प्रतिबद्ध व्यय के मद में पिछली बार की तुलना में 25298.92 करोड़ की वृद्धि है।
वित्त मंत्री ने बहुचर्चित मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का भी उल्लेख किया, जिसे पिछले वर्ष नवंबर में हुए विधानसभा चुनावों से पहले लागू किया गया था।

बताया कि इस योजना के अंतर्गत 1.56 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये हस्तांतरित किए गए। यथाशीघ्र अतिरिक्त दो-दो लाख रुपये दिए जाएंगे।
जाति आधारित गणना में चिह्नित 94 लाख गरीब परिवारों को लघु उद्यमी योजना के माध्यम से सशक्त बनाने का संकल्प है। सबका सम्मान-जीवन आसान के अंतर्गत बिहार वृद्धजनों को घर पर ही स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाएंगी और संपत्ति पंजीकरण की सुविधा भी।
उद्योग जगत को मिलेगी उड़ान
बिजेंद्र ने बताया कि सात निश्चय-3 के घटक समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार के अंतर्गत बंद पड़ी चीनी मिलों को चरणबद्ध तरीके से चालू किया जाएगा और नई चीनी मिलों की स्थापना होगी। कौशल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 2690 युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कारिडोर के अंतर्गत गयाजी में आइएमसी के फेज-2 को विकसित किया जाएगा। पटना जिला में फतुहा के पास मल्टी-माडल लाजिस्टिक पार्क और फिनटेक सिटी की स्थापना होगी।सारण जिला के अमनौर में फार्मास्युटिकल पार्क विकसित किया जाएगा।

बिहार को पूर्वी भारत के नए टेक हब के साथ वैश्विक बैक एंड हब के रूप में स्थापित किया जाना है। इसके लिए डिफेंस कारिडोर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, मेगा टेक सिटी व फिनटेक सिटी का प्रस्ताव है।
इसके साथ ही स्टार्ट-अप और दूसरे न्यू एज इकोनामी प्रक्षेत्र में रोजगार सृजन के लिए उद्यमियों को प्रोत्सहित करने की कार्ययोजना बनाई जा रही है।
घाटे का बजट और ऋण भरपूर
बजट प्रस्ताव प्रस्तुत करने के बाद प्रेस-वार्ता कर बिजेंद्र ने बताया कि सरकार सबका साथ-सबका विकास और न्याय के साथ विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए 7724 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है।
औद्योगिकरण, शहरी विकास, सुलभ संपर्कता, ईको-टूरिज्म, चतुर्थ कृषि रोड-मैप, शिक्षा और स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता के क्षेत्र हैं। ये सात निश्चय-3 के भी घटक हैं और बजट में इन क्षेत्रों के लिए पर्याप्त प्रविधान किया गया है।

वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने बताया कि सरकार के अपने स्रोतों से राजस्व में वृद्धि हो रही है। सरकार को 2026–27 में अपने कर राजस्व से लगभग 65800 करोड़ रुपये मिलने की आशा है।
कुल देनदारी सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 34.09 प्रतिशत और राजकोषीय घाटा 2.9 प्रतिशत अनुमानित है, जो निर्धारित अधिसीमा से कम ही है।

उल्लेखनीय है कि चालू वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटा 2.98 प्रतिशत रहने का अनुमान था, जो अब बढ़कर 11 प्रतिशत से भी अधिक हो सकता है।
इसे तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए, जबकि यह बजट 1143.19 करोड़ रुपये सरप्लस का है। इस पर सरकार ने तय किया है कि नए वित्तीय वर्ष में 61939.49 करोड़ का ऋण भी लेगी।
बिहार का बजट आकार पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। यह वृद्धि राज्य की विकास, अवसंरचना और सामाजिक क्षेत्रों में निवेश करने की बढ़ी हुई क्षमता को दर्शाती है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए बिहार को केंद्र सरकार से सतत और सशक्त सहयोग की अपेक्षा है, जिसमें पर्याप्त कर-बंटवारा, केंद्र प्रायोजित योजनाओं हेतु अधिक वित्तीय आवंटन, बड़ी अवसंरचना एवं कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए विशेष सहायता के साथ बाढ़-सुखाड़ जैसी संरचनात्मक चुनौतियों के समाधान हेतु नदियों के जोड़ जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं में केंद्रीय सहयोग अपेक्षित है। - बिजेंद्र प्रसाद यादव, वित्त मंत्री, बिहार
