बिहार में मछली उत्पादन को बढ़ावा: SC-ST और EBC पालकों को तालाब निर्माण पर 80 प्रतिशत तक अनुदान
बिहार में छोटे मत्स्य पालकों को बढ़ावा देने के लिए सहकारिता विभाग कोऑपरेटिव सोसाइटी बनाएगा।

मछली पालकों की बल्ले-बल्ले। (जागरण)
HighLights
छोटे मत्स्य पालकों के लिए कोऑपरेटिव सोसाइटी का गठन।
मछली पालन और परिवहन पर 50-90% तक सब्सिडी।
वेटलैंड क्लस्टर से 5 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन का लक्ष्य।
दीनानाथ साहनी, पटना। बिहार में मछली पालन और उसे अच्छे बाजार भाव में बिक्री के लिए अब छोटे-छोटे मत्स्य पालकों को कोऑपरेटिव सोसाइटी तैयार होगी।
ऐसे मत्स्य पालकों को मछली पालन में बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी भी दी जाएगी। यह कार्य पहली बार सहकारिता विभाग के माध्यम से होगा।
इसके लिए विभाग द्वारा प्रखंड एवं पैक्स स्तर पर विशेष फिशरी क्लस्टर तैयार किए जाएंगे। विभाग ने विजन-2030 के तहत मत्स्य पालकों को कोऑपरेटिव सोसाइटी से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।
साथ ही, वेटलैंड क्लस्टर बनाकर चौर विकास की पहल भी की जाएगी, जहां मछली पालन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। पहले चरण में सारण, सिवान, मधुबनी, सुपौल, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, भागलपुर और मुंगेर में वेटलैंड क्लस्टर बनाकर चौर विकास योजना पर नाबार्ड से 195 करोड़ रुपये की मदद ली जाएगी।
पांच लाख टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य
बिहार से पलायन रोकने एवं बेरोजगारी कम करने की दिशा में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग तथा सहकारिता विभाग ने मिलकर मछली उत्पादन करने का निर्णय लिया है।
इस पर 29 जुलाई 2026 को दोनों विभाग की उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। तब सहकारिता के माध्यम से पांच लाख टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया था।
राज्य में सालाना 9.59 लाख टन से 10.28 लाख टन तक मछली उत्पादन किया जा रहा है। किंतु, छोटे-छोटे मत्स्य पालकों द्वारा बड़े स्तर पर मछली उत्पादन कराकर उसे रोजगार से जोड़ने की प्राथमिकता दी जाएगी।
जिससे पलायन रोकने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी। मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार मत्स्य पालकों को 50 प्रतिशत से लेकर 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रही है।
यही सब्सिडी का लाभ कोऑपरेटिव सोसाइटी के जरिये मस्त्य पालकों को मुहैया करायी जाएगी। इतना ही नहीं, मछली की बिक्री और परिवहन को सुगम बनाने के लिए मोपेड, तिपहिया और चार पहिया वाहनों की खरीद पर 90 प्रतिशत तक की विशेष सब्सिडी का प्रविधान किया गया है।
तालाब निर्माण और अन्य उपकरणों के लिए भी अनुदान
सहकारिता विभाग के मुताबिक मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के मत्स्य पालकों को तालाब निर्माण तथा अन्य उपकरणों के लिए 80 प्रतिशत तक का अनुदान भी मितेगा।
अभी जो मत्स्यजीवी सहकारी समितियां प्रखंड स्तर पर गठित हैं उनका विस्तार किया जाएगा। प्राथमिक मत्स्यजीवी सहकारी समितियों को जिला, जिला समूह और प्रमंडल स्तरीय संघों से जोड़ने की प्राथमिकता दी जा रही है, जिन्हें राज्य स्तरीय परिसंघ से जोड़ा जाएगा।
विभाग के स्तर से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ बिहार को मत्स्य निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की महत्वपूर्ण पहल भी जा रही है। इसके माध्यम से लाखों परिवारों की आय में वृद्धि की जा सकती है। बिहार के पास नदियां, तालाब, जलाशय जैसे प्रचुर जल संसाधन उपलब्ध हैं। इनका समुचित उपयोग कर हम मत्स्य उत्पादन बढ़ा सकते हैं। सहकारिता के माध्यम से छोटे-छोटे मत्स्य पालकों को संगठित कर उन्हें नई ताकत देने की कोशिश की जा रही है।
