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बिहार के 29 जिलों में बनाए जाएंगे हाईटेक एग्जाम सेंटर, चुनाव के लिए भी होंगे इस्तेमाल; ₹330 करोड़ से अधिक खर्च

Published: Sat, 19 Sep 2026 09:02 AM (IST)

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति 29 जिलों में 330 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बहुउद्देशीय हाईटेक परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह का निर्माण करेगी।

एआई जनरेटेड फोटो

एआई जनरेटेड फोटो

HighLights

  1. बिहार बोर्ड 29 जिलों में बनाएगा हाईटेक परीक्षा भवन।

  2. कुल 330 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी।

  3. प्रत्येक भवन में 4000 परीक्षार्थी एक साथ बैठ सकेंगे।

जागरण संवाददाता, पटना। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) राज्य के 29 जिलों में बहुउद्देशीय हाईटेक परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह का निर्माण कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए कुल 330 करोड़ सात लाख 13 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

तकनीकी अनुमोदन मिलने के बाद भवन निर्माण विभाग को निर्माण की जिम्मेदारी दी गई है। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने बताया कि 27 जिलों में 29 स्थानों पर चार मंजिला (जी प्लस - थ्री ) परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह का निर्माण कराया जाएगा।

प्रत्येक भवन के लिए करीब एक से डेढ़ एकड़ भूमि चिह्नित की जा चुकी है। दरभंगा प्रमंडल के मधुबनी और समस्तीपुर में दो-दो परीक्षा भवन बनाए जाएंगे।

9 जिलों में पहले से संचालित हैं परीक्षा भवन

उन्होंने बताया कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से पहले ही राज्य के नौ प्रमंडलीय मुख्यालय वाले जिलों में परीक्षा भवन-सह-क्षेत्रीय कार्यालयों का निर्माण कराया जा चुका है।

इन भवनों का उपयोग ऑनलाइन परीक्षा केंद्र, गैर आवासीय निशुल्क कोचिंग तथा समिति के क्षेत्रीय कार्यालय के रूप में किया जा रहा है। अब शेष जिलों में भी परीक्षा के लिए स्थाई और आधुनिक आधारभूत संरचना विकसित की जा रही है।

इन जिलों में होगा निर्माण

परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह के लिए जिन जिलों में भूमि चिह्नित कर निर्माण की स्वीकृति दी गई है, उनमें पटना प्रमंडल के रोहतास, कैमूर, नालंदा, भोजपुर और बक्सर शामिल हैं।

मगध प्रमंडल में नवादा, औरंगाबाद और जहानाबाद, तिरहुत प्रमंडल में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी और वैशाली, जबकि सारण प्रमंडल में सीवान और गोपालगंज में भवन बनाए जाएंगे।

इसी तरह कोसी प्रमंडल के मधेपुरा और सुपौल, मुंगेर प्रमंडल के शेखपुरा, लखीसराय, बेगूसराय, जमुई और खगड़िया, भागलपुर प्रमंडल के बांका, पूर्णिया प्रमंडल के किशनगंज, अररिया और कटिहार तथा दरभंगा प्रमंडल के मधुबनी और समस्तीपुर में निर्माण होगा। मधुबनी और समस्तीपुर में दो-दो परीक्षा भवन प्रस्तावित हैं।

स्कूल-कालेजों में पढ़ाई नहीं होगी प्रभावित

वर्तमान में बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार कर्मचारी चयन आयोग, बिहार तकनीकी सेवा आयोग, बिहार पुलिस अधीनस्थ सेवा आयोग समेत विभिन्न विभागों और आयोगों की प्रतियोगी परीक्षाएं जिला स्तर पर विद्यालयों और कालेजों में आयोजित होती हैं। इससे इन संस्थानों की आंतरिक परीक्षाओं और नियमित पठन-पाठन पर असर पड़ता है।

नए परीक्षा भवन बनने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विद्यालयों और कॉलेजों पर निर्भरता कम होगी। इससे शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई और आंतरिक परीक्षाएं नियमित रूप से संचालित की जा सकेंगी।

एक भवन में चार हजार परीक्षार्थी दे सकेंगे परीक्षा

हाईटेक परीक्षा भवनों में एक साथ चार हजार परीक्षार्थियों के बैठने की व्यवस्था होगी। परीक्षा के दौरान पूरे परिसर की निगरानी सीसीटीवी से की जाएगी। परीक्षा समाप्त होने के बाद उत्तरपुस्तिकाओं को सुरक्षित रखने के लिए भवन में स्टोरेज की सुविधा होगी।

इन भवनों का उपयोग मूल्यांकन केंद्र के रूप में भी किया जा सकेगा। आवश्यकता पड़ने पर उत्तरपुस्तिकाओं की बारकोडिंग और स्कैनिंग का काम भी यहीं कराया जा सकेगा।

गोपनीय सामग्री के साथ निर्वाचन कार्य में भी होगा उपयोग

विकास आयुक्त ने बताया कि भवन से जुड़े वज्रगृह (स्ट्रांग रूम) में परीक्षाओं से संबंधित गोपनीय सामग्री सुरक्षित रखी जा सकेगी।

इसके अलावा आवश्यकता के अनुसार, निर्वाचन से संबंधित संवेदनशील सामग्री के भंडारण के लिए भी इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे निर्वाचन कार्य के लिए विद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों का उपयोग कम होगा और वहां पठन-पाठन बाधित नहीं होगा।

24 घंटे सीसीटीवी और अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था

इन बहुउद्देशीय भवनों में फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण और आपदा प्रबंधन से संबंधित व्यवस्थाएं रहेंगी। परिसर की 24 घंटे सीसीटीवी के माध्यम से निगरानी और रिकार्डिंग की व्यवस्था होगी।

जिला मुख्यालय के प्रमुख संस्थानों में परीक्षा केंद्र होने से परीक्षार्थियों को केंद्र तक पहुंचने में होने वाली परेशानी और अतिरिक्त समय की समस्या भी कम होने की उम्मीद है।

संबंधित स्कूल-कॉलेजों को सौंपे जाएंगे भवन

जिस विद्यालय या कालेज परिसर में परीक्षा भवन-सह-वज्रगृह का निर्माण होगा, निर्माण पूरा होने के बाद उसका संचालन उसी संस्थान को सौंपा जाएगा। भवन से प्राप्त राजस्व में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति और संबंधित विद्यालय या कॉलेज की हिस्सेदारी होगी।

संबंधित शिक्षण संस्थान अपनी आवश्यकता के अनुसार इन भवनों में शैक्षणिक गतिविधियां और आंतरिक परीक्षाएं भी आयोजित कर सकेंगे। इससे संस्थानों को परीक्षा संचालन के लिए अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध होगी।

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