पटना, सुनील राज। Bihar Assembly Election 2020 : महागठबंधन से हिंदुस्‍तानी आवाम मोर्चा  के अलग हो जाने के बाद कांग्रेस अब अधिक सीटों पर दावा करने की रणनीति बना रही है। जीतनराम मांझी के निकल जाने और उपेंद्र कुशवाहा तथा मदन सहनी के असमंजस की वजह से कांग्रेस को कुछ अधिक पाने की संभावनाएं दिख रही। लिहाजा पार्टी ने अपनी चादर फैलानी शुरू कर दी है।  गठबंधन में राजद के बाद अपनी अच्‍छी स्थिति को भुनाने की जुगत में है। कांग्रेस के लिए इस बार का विधानसभा चुनाव कुछ अधिक ही महत्वपूर्ण है। पिछले कई चुनावों के बाद 2015 में सम्मानजनक जीत मिली थी। इस बार उससे आगे बढऩे के मौके खोजे जा रहे। दिल्ली से लेकर पटना तक नई टीम जोश के साथ बल्लेबाजी कर रही। आखिरकार संभावनाओं की जमीन को उपजाऊ देख भला कांग्रेस भला अपने पांव फैलाने से गुरेज क्यों करें? बता दें कि महागठबंधन में अब तक सीट बंटवारा नहीं होने के कारण छोटे घटक दलों में बेचैनी है। मगर राजद और कांग्रेस जोर-शोर से अपनी चुनावी तैयारियों में जुटे हुए हैं।

नए इलाकों पर नजर 

2015 में 27 सीटों पर जीत मिली थी। उन सीटों पर फिर से उतरना पक्का है। इसके अलावा संभावना वाली कुछ अन्य सीटों पर भी लडऩे की तैयारी है। पार्टी के स्थानीय नेता वहां जीतने का दम-खम भर रहे। हालांकि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचने के पहले सीट बंटवारे का इंतजार कर लेना चाहता है। कांग्रेस की प्रदेश इकाई का नेतृत्व करने वाले नेता मानते हैं कि 2015 के चुनाव में महागठबंधन का हिस्सा रही जदयू और इसके बाद हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के बाहर होने से कांग्रेस के लिए संभावनाएं बढ़ी हैं। पिछले चुनाव की तरह इस बार 101-101 और 41 का फार्मूला नहीं चलेगा। राष्ट्रीय दल होने के नाते कांग्रेस को ज्यादा सीटें मिलना तय है। इस प्रकार के दावे करने वाले नेता भी सीटों को लेकर एकमत नहीं हैं। कोई 80 सीट मिलने के दावे कर रहा है, तो कोई यह मानता है कि कांग्रेस को इस बार चुनाव में कम से कम 65 सीटों पर जोर आजमाइश का मौका मिल सकता है। 

  इन नए सीटों पर दावा करने का मन बना रही पार्टी

पार्टी के सूत्र बताते हैं कि प्रदेश कांग्रेस को लीड करने वाले नेताओं ने पटना शहरी क्षेत्र की दो सीटों कुम्हरार और बांकीपुर के साथ ही ग्रामीण इलाकों में भी कदम जमाने का फैसला किया है। पटना के अलावा भागलपुर में पिछले चुनाव जीती गई सीट भागलपुर और कहलगांव के साथ ही सुल्तानगंज और नाथनगर पर भी दावा करने का पार्टी मन बना रही है। तर्क है कि दोनों नए क्षेत्र अल्पसंख्यक आबादी वाले क्षेत्र हैं, जहां से कांग्रेस सहजता से जीत सकती है। इससे महागठबंधन की ताकत बढ़ेगी। इसके अलावा कटिहार में एक की बजाय दो सीट, रोहतास में चेनारी के अलावा काराकाट, इधर बिहारशरीफ और मुजफ्फरपुर के साथ ही अरवल की दो सीटों पर भी पार्टी दावा करने का मसौदा तैयार कर चुकी है।

आलाकमान से विमर्श के बाद होगा अंतिम फैसला

हालांकि यह पूरा मामला अभी प्रस्ताव के स्तर पर ही है। इस मामले पर पहले पार्टी के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल, दोनों सचिव अजय कपूर और वीरेंद्र सिंह राठौर के स्तर पर विचार मंथन किया जाएगा इसके बाद नई जमीन के संबंध में पार्टी के आलाकमान से विमर्श होगा। जहां इस पर अंतिम सहमति बनेगी।

2015 में यहां से जीती कांग्रेस

रोसड़ा, बछवाड़ा, बेगूसराय, कहलगांव, भागलपुर, बरबीघा, गोविंदपुर, सिकंदरा, कुटुम्बा, औरंगाबाद, वजीरगंज, बिक्रम, मांझी, बक्सर जैसे विधानसभा क्षेत्रों पर आसानी से जीत दर्ज कराई। इनके अलावा नकटियागंज, बेतिया, रीगा, भोरे, बेनीपट्टी, अररिया, बहादुरगंज, किशनगंज, अमौर, कस्बा, कदवा, मनिहारी और कोढ़ा विधानसभा क्षेत्र भी जीता।

2015 यहां मिली थी कांग्रेस को पराजय

मोहनिया, चेनारी, गया टाउन, हाजीपुर, बांकीपुर, कुम्हरार, बथनाहा, वाल्मीकि नगर, रामनगर, गोविंदगंज, पूर्णिया, हरलाखी, प्राणपुर और तरारी।

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