2005 में दीपावली पर ही क्यों थम गई थी NDA कार्यकर्ताओं की खुशी? 22 नवंबर को जमकर हुई थी आतिशबाजी
Diwali 2026: वर्ष 2005 में बिहार विधानसभा चुनाव दीपावली के आसपास हुए, जहां एनडीए कार्यकर्ताओं ने नतीजों के बाद जश्न ...और पढ़ें

2005 में नीतीश कुमार बने थे सीएम और सुशील मोदी डिप्टी सीएम। फाइल
HighLights
2005 में दीपावली के दिन बिहार में चुनावी माहौल था।
नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए ने बहुमत हासिल किया।
जहानाबाद जेल ब्रेक ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
डिजिटल डेस्क, पटना। Diwali 2026: दीपावली रोशनी, खुशियों और नई उम्मीदों का त्योहार है। इस बार आठ नवंबर को जब बिहार समेत देशभर में दीप जलेंगे, तब 21 साल पुरानी एक राजनीतिक दीपावली का किस्सा भी याद आता है।
वर्ष 2005 में बिहार में दीपावली के दिन (1 नवंबर) भी चुनावी माहौल था। त्योहार की खुशियों के बीच लोगों की निगाहें विधानसभा चुनाव के नतीजों पर टिकी थीं।
उस समय एनडीए के कार्यकर्ताओं ने कहा था कि असली दीपावली तो चुनाव परिणाम आने के बाद मनाएंगे। उनकी यह उम्मीद 22 नवंबर को पूरी हुई।
24 नवंबर 2005 को नीतीश ने ली शपथ
चुनाव परिणाम में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए ने बहुमत हासिल किया। 24 नवंबर को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
उस साल एक नवंबर को दीपावली थी। विधानसभा चुनाव के दो चरणों का मतदान 18 और 26 अक्टूबर को हो चुका था। छठ पर्व पांच से आठ नवंबर तक मनाया गया।
इसके बाद 13 नवंबर को तीसरे और 19 नवंबर को चौथे चरण का मतदान होना था। बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू था और नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सत्ता परिवर्तन की लड़ाई लड़ रहा था। त्योहारों के बीच भी चुनाव प्रचार की गहमागहमी बनी हुई थी।
दीपावली और छठ के बीच नीतीश ने मांगे वोट
एक से 13 नवंबर के बीच नीतीश कुमार लगातार चुनावी सभाएं कर रहे थे। उनकी रैलियों में एक अपील बार-बार सुनाई देती थी।
वह लोगों से कहते थे कि जिस उत्साह से दीपावली और छठ मनाते हैं, उसी उत्साह से लोकतंत्र के पर्व में भी भाग लें और मतदान के दिन अपने मताधिकार का इस्तेमाल करें।
उस चुनाव में एनडीए का मुख्य मुद्दा कानून-व्यवस्था था। नीतीश कुमार अपनी सभाओं में बिहार में कानून का राज स्थापित करने का वादा करते थे।
मतदान के दिन ही जहानाबाद जेल ब्रेक ने देश को चौंकाया
13 नवंबर 2005 को तीसरे चरण में 72 विधानसभा सीटों पर मतदान होना था। इसी दिन रात करीब नौ बजे जहानाबाद में नक्सलियों ने जेल पर हमला कर दिया।
लगभग 300 से 400 हथियारबंद नक्सलियों ने एक साथ सीआरपीएफ कैंप, टाउन थाना, पुलिस लाइन और उपकारा को निशाना बनाया।
हमलावरों ने जेल पर धावा बोलकर 389 कैदियों को बाहर निकाल लिया। इनमें नक्सली संगठन के शीर्ष नेता और रणवीर सेना से जुड़े बंदी भी शामिल थे।
हमले के दौरान जेल से हथियार और कारतूस भी लूटे गए। करीब दो घंटे तक जहानाबाद में अफरातफरी का माहौल रहा। इस घटना ने बिहार की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
चुनावी बहस के केंद्र में आया कानून-व्यवस्था का मुद्दा
जहानाबाद जेल ब्रेक की घटना ने चुनाव के बीच कानून-व्यवस्था को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया। एनडीए पहले से ही इसी मुद्दे पर जनता से बदलाव का समर्थन मांग रहा था।
इस घटना को विपक्षी शासन व्यवस्था की विफलता के उदाहरण के तौर पर पेश किया गया। हालांकि, चुनाव परिणाम पर इसका कितना प्रभाव पड़ा, इसे अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
इसके बाद 19 नवंबर को चौथे चरण का मतदान हुआ। 22 नवंबर को मतगणना के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए ने बहुमत हासिल कर लिया।
चुनाव परिणाम आते ही कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया। दीपावली पर कही गई उनकी बात सच हो गई। दो दिन बाद 24 नवंबर को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
त्योहार के बाद आई राजनीतिक बदलाव की रोशनी
वर्ष 2005 की दीपावली बिहार के लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि राजनीतिक बदलाव की प्रतीक्षा का समय भी थी। एक ओर घरों में दीप जल रहे थे, दूसरी ओर चुनावी नतीजों को लेकर चर्चाएं चल रही थीं।
एनडीए के कार्यकर्ता परिणाम के बाद दीपावली मनाने की बात कह रहे थे। 22 नवंबर को चुनाव परिणाम आने के साथ ही उनके लिए जश्न का अवसर आ गया।