बख्तियारपुर का नाम 'नीतीशपुर' और JDU का नाम 'JDN' करने की मांग, बिहार में छिड़ी नई राजनीतिक बहस
बिहार में बख्तियारपुर का नाम 'नीतीशपुर' और जदयू का नाम 'जनता दल नीतीश' करने की मांग पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है।

पूर्व सीएम और राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार। (PTI)
HighLights
बख्तियारपुर का नाम 'नीतीशपुर' करने की मांग उठी।
जदयू का नाम 'जनता दल नीतीश' करने का प्रस्ताव।
नीतीश कुमार की विरासत पर राजनीतिक बहस तेज।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार की राजनीति में अब नाम बदलने को लेकर नया विवाद खड़ा होता दिख रहा है। बख्तियारपुर का नाम बदलकर 'नीतीशपुर' करने और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का नाम 'जनता दल नीतीश' (जदएन) करने की मांग को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
यह पहल सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत से जोड़कर देखी जा रही है। हालांकि, प्रस्ताव के राजनीतिक निहितार्थ को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अलग-अलग राय है।
बख्तियारपुर नीतीश कुमार की जन्मस्थली होने के कारण लंबे समय से उनकी राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ऐसे में इसके नाम के साथ नीतीश कुमार का नाम जोड़ने की मांग को समर्थक उनके लंबे राजनीतिक योगदान और बिहार के विकास में भूमिका से जोड़ रहे हैं। दूसरी ओर, विरोधियों ने कटाक्ष शुरू कर दिया है।
संजय कुमार झा ने छेड़ी चर्चा
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा एवं एनडीए घटक दल हम सेक्यूलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष व लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन की ओर छेड़ी गई चर्चा अब दूर तलक पहुंचने संकेत मिल रहे है।
विशेषकर जदयू विधान मंडल दल के नेता श्रवण कुमार व उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के समर्थन ने प्रस्ताव को हवा दे दी है।
'यह पार्टी का विषय'
यही नहीं, एनडीए के प्रमुख घटक एवं सबसे बड़े दल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने जदयू का नाम जदएन करने पर कहा कि यह किसी भी पार्टी का आंतरिक विषय है।
वहीं, बख्तियारपुर का नाम बदल कर नीतीशपुर किए जाने पर सरावगी ने कहा कि यह विषय विशुद्ध रूप से सामाजिक एवं स्थानीय जनसमूह का भावना से जुड़ा है। लेकिन मेरा मानना है कि बख्तियारपुर व सुलतानगंज जैसे नाम को जरूर ही बदला जाना चाहिए। किसी आतताई या आक्रांता के नाम पर तो नहीं रहना चाहिए।
विदित हो कि नाम परिवर्तन की राजनीति बिहार में नई नहीं है। समय-समय पर शहरों, सड़कों और संस्थानों के नाम बदलने को लेकर राजनीतिक दल अपनी विचारधारा और राजनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप मांग उठाते रहे हैं।
लेकिन बख्तियारपुर के नाम को 'नीतीशपुर' करने का प्रस्ताव इसलिए अधिक राजनीतिक महत्व रखता है, क्योंकि यह सीधे बिहार के एक प्रमुख राजनीतिक चेहरे पूर्व मुख्यमंत्री एवं जदयू प्रमुख नीतीश कुमार की जन्मभूमि से जुड़ा है।
बिहार में शुरू हुई बहस
इसी के साथ जदयू का नाम बदलकर 'जदएन' करने की चर्चा ने पार्टी की पहचान और नेतृत्व को लेकर भी बहस छेड़ दी है। जदयू की राजनीति में नीतीश कुमार की भूमिका को देखते हुए नाम में उनके नाम को शामिल करने की मांग को उनके समर्थक स्वाभाविक राजनीतिक सम्मान के तौर पर पेश कर सकते हैं।
वहीं, आलोचक इसे पार्टी को व्यक्ति विशेष की राजनीतिक विरासत से जोड़ने की कोशिश बता सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि यह मुद्दा आगे बढ़ता है तो इसका असर केवल नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं रहेगा। यह नीतीश कुमार की विरासत, जदयू की पहचान और बिहार की राजनीति में उनके योगदान को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है।
आने वाले दिनों में विभिन्न दलों और नेताओं की प्रतिक्रिया से यह साफ होगा कि यह मांग महज प्रतीकात्मक पहल है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है।
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इससे अच्छा कोई प्रस्ताव नहीं हो सकता है। इसके लिए प्रस्ताव पार्टी की ओर से लाया जाए। दोनों प्रस्ताव को सर्वसम्मती से पास किया जाएगा। स्वागत योग्य पहल है।
श्रवण कुमार, नेता जदयू विधानमंडल दल एवं मंत्री ग्रामीण विकास विभाग
