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सीने पर 21 कलश रखकर 9 दिनों तक निर्जला व्रत, दरभंगा के नागेश्वर दास 30 सालों से कर रहे मां की अराधना 

Published: Sun, 11 Oct 2026 10:27 AM (IST)

बाबा नागेश्वर दास 30वें वर्ष शारदीय नवरात्र (Navratri 2026) में 9 दिनों तक निर्जला उपवास रखकर अपने सीने पर 21 कलश स्थापित कर मां दुर्गा की विशेष साधना करेंगे।

सीने पर कलश रखे हुए बाबा। फोटो जागरण

सीने पर कलश रखे हुए बाबा। फोटो जागरण

HighLights

  1. बाबा नागेश्वर दास 30वें वर्ष कर रहे विशेष नवरात्र साधना।

  2. 9 दिनों तक निर्जला उपवास, सीने पर 21 कलश स्थापित।

  3. 1996 से हर साल सीने पर कलश रखकर करते हैं आराधना।

जागरण संवाददाता, पटना। आस्था जब संकल्प बन जाए, तो कठिन से कठिन साधना भी भक्ति का उत्सव बन जाती है। मां दुर्गा के प्रति इसी अटूट श्रद्धा और विश्वास के साथ बाबा नागेश्वर दास 30वें वर्ष शारदीय नवरात्र में विशेष साधना करेंगे।

इस दौरान वे 9 दिनों तक निर्जला उपवास रखकर 21 कलशों को सीने पर स्थापित कर मां दुर्गा की भक्ति में लीन रहेंगे।

बाबा नागेश्वर दास बताते हैं कि है कि सच्चे मन से की गई आराधना साधक को आंतरिक शक्ति और आत्मबल प्रदान करती है। मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और विश्वास कठिन साधना को पूरा करने का संबल देते हैं।

वर्ष 1985 में की थी कठिन तपस्या

दरभंगा के रहने वाले बाबा ने बताया कि वर्ष 1985 में गुवाहटी स्थित मां कामाख्या मंदिर में नवरात्र के मौके पर कठिन तपस्या की थी।

लगातार तीन साल तक हर नवरात्र में मां की चौखट पर प्रार्थना करने पहुंच जाते थे। मां की कृपा पाने के बाद रोजी-रोटी के लिए पटना आ गए।

अपना पेट भरने के लिए मंदिर के पास स्थित होटलों में पानी देने का काम करते रहे, कुछ समय बाद मंदिर में नवरात्र के समय मां की पूजा आरंभ की।

40 सालों से कर रहे अराधना

वर्ष 1996 से वे हर साल अपने सीने पर कलश स्थापित कर नवरात्र में मां दुर्गा की उपासना करते हैं। पहले साल उन्होंने सीने पर एक कलश रखा था। बाद में कलशों की संख्या बढ़ती गई।

बीते तीन साल से सीने पर 21 कलश रखकर नवरात्र में मां की पूजा कर रहे हैं। इसके लिए वे 15 दिन पहले से योगाभ्यास आरंभ कर देते हैं। 24 घंटे में थोड़ा अन्न और जल ग्रहण करना आरंभ कर देते हैं।

नवरात्र आरंभ होने के तीन-चार दिन पहले अन्न और जल का प्रयोग नहीं के बराबर करते हैं। इस दौरान नित्य के क्रियाकलाप भी बंद हो जाते हैं। अपने सीने पर कलश लेकर नौ दिनों तक की मां की आराधना में लीन रहते हैं।

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