JDU से निष्कासन के बाद अनंत सिंह की विधायकी पर नजर, शरद यादव के मामले से कैसे जुड़ता है घटनाक्रम?
जदयू ने विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया ...और पढ़ें
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शरद यादव और अनंत सिंह। फाइल
HighLights
अनंत सिंह और पत्नी नीलम देवी 6 साल के लिए निष्कासित।
जदयू ने अनंत सिंह की विधायकी रद्द करने की अनुशंसा की।
दल बदल कानून के तहत होगी अनंत सिंह पर कार्रवाई।
राज्य ब्यूरो, पटना। विधान परिषद की शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदान के अगले दिन शनिवार को जदयू ने अपने विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी पूर्व विधायक नीलम देवी को 6 वर्षों के लिए दल से निष्कासित कर दिया है।
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की सदन से सदस्यता रद करने की अनुशंसा भी कर दी है।
उन पर संविधान की 10 वीं अनुसूची के तहत कार्रवाई होगी, जिसमें दल विरोधी आचरण प्रमाणित होने पर सदस्यता रद करने का प्रावधान है।
अनुज सिंह के लिए प्रचार करने की सजा
अनंत सिंह पर यह कार्रवाई विधान परिषद के स्नातक क्षेत्र के चुनाव में जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार करने के आरोप में हुई है।
इस चुनाव में अनंत सिंह ने न केवल जनसुराज के उम्मीदवार का प्रचार किया, बल्कि जदयू के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध भी किया।
जदयू ने विधानसभा अध्यक्ष को साक्ष्य के रूप में वह वीडियो उपलब्ध कराया है, जिसमें अनंत सिंह सार्वजनिक मंच से जनसुराज के उम्मीदवार के लिए वोट मांग रहे हैं। जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार को हराने की अपील कर रहे हैं।
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष नेे निष्कासन पत्र में लिखा है कि अनंत सिंह लगातार शीर्ष नेतृत्व की आलोचना कर रहे थे। अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर रहे थे। पटना स्नातक क्षेत्र के चुनाव में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के विरुद्ध प्रचार किया।
क्या कहता है दल बदल विरोधी कानून
इस कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि अगर किसी दल का निर्वाचित सदस्य अगर दूसरे दल के लिए प्रचार करता है। दूसरे दलों के मंचों पर जाता है।
और सार्वजनिक रूप से संबद्ध पार्टी के विरुद्ध विभिन्न मंचों पर बयानबाजी करता है तो यह मान लिया जाएगा कि उन्होंने स्वेच्छा से उस दल का त्याग कर दिया है।
स्वेच्छा से दल त्याग करने की स्थिति में सदन की सदस्यता चली जाती है। इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि सदस्य लिखित रूप से दल की सदस्यता का त्याग करे।
क्या था शरद यादव का मामला
लगभग ऐसे ही आरोप जदयू के वरिष्ठ नेता एवं तत्कालीन राज्यसभा सदस्य शरद यादव और अली अनवर अंसारी की राज्यसभा सदस्यता रद हुइ थी।
2017 में शरद यादव ने भाजपा के साथ जदयू के गठबंधन का विरोध किया था। उन्होंने यह विरोध राजद के राजनीतिक मंच पर खड़ा होकर किया था।
जदयू की अनुशंसा पर चार दिसंबर 2017 को शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता रद हो गई। इसे बचाने के लिए दोनों ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया। लेकिन, सदस्यता बहाल नहीं हो सकी। राज्यसभा के तत्कालीन सभापति ने माना कि शरद यादव ने स्वेच्छा से दल का त्याग किया है। 12 जनवरी 2023 को शरद यादव का निधन हो गया।
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