इलाज कराने आए परिजन न हो जाएं बीमार: AIIMS पटना में 20 लोगों का शेड और सैकड़ों मरीज, खुले में सोने को मजबूर लोग
एम्स पटना में इलाज के लिए आए मरीजों के परिजनों को रात खुले में बितानी पड़ रही है, क्योंकि मौजूदा ...और पढ़ें

खुले में सोने को मजबूर लोग
HighLights
एम्स पटना में मरीजों के परिजन खुले में रात गुजारने को मजबूर।
20 लोगों की क्षमता वाला शेड सैकड़ों मरीजों के लिए अपर्याप्त।
खुले में सोने से परिजनों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा बुरा असर।
संवाद सूत्र, फुलवारी शरीफ। एम्स पटना में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों की रातें किसी परीक्षा से कम नहीं हैं। सुबह से पंजीकरण और इलाज की प्रक्रिया में दिन गुजर जाता है। जांच, रिपोर्ट और आगे की प्रक्रिया पूरी होने में समय लगने पर दूर-दराज से आए मरीजों के परिजनों को रात खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ती है। रात का नजारा यह बताने के लिए काफी है कि इलाज की आस में आए लोगों पर क्या बीत रही है।
एम्स परिसर में मरीजों के परिजनों के लिए बना शेड करीब 20 लोगों की क्षमता के कारण जरूरत के सामने बेहद छोटा पड़ रहा है। जगह नहीं मिलने पर लोग परिसर में जहां जगह मिलती है, वहीं चादर बिछाकर रात काटने को मजबूर हैं।
खुले में रात गुजारने से उनकी तबीयत भी बिगड़ने लगी
मच्छरों का प्रकोप, कीड़े-मकोड़ों का डर और सामान चोरी होने की चिंता के बीच रात करवट बदलते हुए गुजरती है। मरीज के साथ आए परिजन पहले से तनाव और चिंता में रहते हैं, उस पर खुले में रात गुजारने से उनकी तबीयत भी बिगड़ने लगी है।
कई मरीजों को एक दिन में भर्ती या इलाज की सुविधा नहीं मिल पाती। ऐसे में दूसरे दिन भी प्रक्रिया पूरी होने की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। रात किसी तरह काटने के बाद सुबह फिर इलाज और जांच की आपाधापी शुरू हो जाती है। सवाल यह है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज के साथ आए परिजन यदि खुद बीमार पड़ जाएं तो उनकी देखभाल कौन करेगा।
ठहरने की व्यवस्था नहीं बढ़ने से समस्या गंभीर
एम्स जैसे बड़े संस्थान में मरीजों की बढ़ती संख्या के अनुरूप भर्ती, प्रतीक्षालय और रात में ठहरने की व्यवस्था नहीं बढ़ने से समस्या गंभीर होती जा रही है। इलाज की लंबी प्रक्रिया के बीच मरीजों और उनके परिजनों को सम्मानजनक और सुरक्षित जगह तक उपलब्ध नहीं होना व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
