पटना के बीच बसा सदियों पुराना गांव हरनीचक, कहानी में विकास के साथ छिपा है पहचान मिटने का दर्द
पटना के हरनीचक गांव ने कृषि प्रधान पहचान खोकर शहरी रूप ले लिया है, जहां खेत अपार्टमेंट में बदल गए ...और पढ़ें

रात में रोशनी से जगमगाता हरनीचक मोहल्ला। जागरण
HighLights
हरनीचक गांव कृषि प्रधान से शहरी क्षेत्र में परिवर्तित हुआ।
खेतों की जगह अपार्टमेंट बने, गांव की पहचान बदल रही है।
शहरीकरण के बावजूद, हरनीचक में बुनियादी सुविधाओं की कमी बरकरार।
सैयद नकी इमाम, फुलवारीशरीफ (पटना)। अनिसाबाद पुलिस कॉलोनी मुख्य मार्ग से महज 50 मीटर की दूरी पर बसा हरनीचक गांव पटना के तेजी से फैलते शहर के बीच अपनी सदियों पुरानी पहचान समेटे खड़ा है।
अंग्रेजों के शासनकाल में राजस्व वसूली के लिए गांवों का सर्वे और वर्गीकरण हुआ तो हरनीचक को राजस्व गांव घोषित कर राजस्व अभिलेख में हरनीचक मौजा दर्ज किया गया।
कभी आसपास के कई टोले और बस्तियों के बीच यह प्रमुख गांव माना जाता था। जिस दौर में शिक्षा चुनिंदा लोगों तक ही पहुंच पाती थी, उस समय भी हरनीचक शिक्षा के मामले में आगे था।
कृषि प्रधान गांव के रूप में थी पहचान
गांव के प्रोफेसर जगत प्रसाद, डाॅ. विश्वनाथ चौधरी और उनके इंजीनियर भाई ने इलाके में अलग पहचान बनाई। बाद में ये लोग पटना में बस गए, लेकिन खेती-बाड़ी और गांव से उनका रिश्ता बना रहा।
हरनीचक की पहचान समृद्ध कृषि प्रधान गांव के रूप में थी। रामप्यारे सिंह, रामनारायण सिंह, रामविलास सिंह और अंबिका सिंह जैसे बड़े किसानों के पास काफी जमीन थी।
धान, गेहूं, आलू, चना और तरह-तरह की सब्जियों की भरपूर पैदावार होती थी। समय बदला और पटना के विस्तार के साथ हरनीचक भी शहर में बदलता गया।
खेत खत्म हुए, जमीन की कीमत आसमान छूने लगी और पुराने खलिहानों की जगह आलीशान मकान व अपार्टमेंट खड़े हो गए। बावजूद इसके गांव की पुरानी परंपराएं आज भी जिंदा हैं।
रामप्यारे सिंह का दलान और रामनारायण मुखिया का दलान सुबह-शाम बैठकी के गवाह हैं। लोग आज भी यहां अपनी समस्याएं रखते, सुख-दुख बांटते और सामूहिक फैसले लेते हैं।
शादी-विवाह और अन्य आयोजनों में सामूहिक भोजन और एक-दूसरे के घर पहुंचने की परंपरा भी कायम है।यह गांव लालू प्रसाद,राबड़ी देवी मीसा भारती का जाना पहचाना गांव है।
कई बार पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यहां पधारे रामनारायण सिंह के दलान पर बैठे हैं। आज भी जब उनका रोड शो होता वह हरनीचक रूक कर पूराने लोगों को खोजते हैं।
हर साल बस रहे 200 नए घर, पुराने बाशिंदों को पहचान मिटने का दर्द
हरनीचक के पुराने बाशिंदों को सबसे अधिक दर्द इस बात का है कि गांव में हर साल करीब 200 नए घर आबाद हो रहे हैं, लेकिन नई आबादी का बड़ा हिस्सा गांव के इतिहास और पुरानी परंपराओं से अनजान है।
पुराने लोग कहते हैं कि नए घर तो लगातार बस रहे हैं, लेकिन नई पीढ़ी न तो हरनीचक का इतिहास जानना चाहती है और न ही गांव के पुराने लोगों से संपर्क रखना चाहती है।
कभी एक-दूसरे के सुख-दुख में खड़ा रहने वाला गांव अब नई और पुरानी आबादी के बीच बंटता नजर आ रहा है। बुजुर्गों को चिंता है कि जिस हरनीचक ने पीढ़ियों को अपनी पहचान दी, कहीं आधुनिक शहर की चमक में उसकी पुरानी पहचान ही न खो जाए।
नगर निगम में शामिल होने के बाद बढ़ी परेशानी
नगर निगम में शामिल होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि सुविधाएं बढ़ेंगी, लेकिन समस्याएं कम नहीं हुईं। मुख्य सड़क की समय-समय पर अलकतरा की जाती है, लेकिन जलनिकासी के लिए बनाया गया नाला कारगर नहीं हो सका।
सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। नगर निगम को टैक्स देने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग पेयजल योजना से वंचित हैं। आलीशान मकानों और आधुनिक अपार्टमेंट के बीच हरनीचक भले ही शहर का हिस्सा बन गया हो।
लेकिन पुराने बाशिंदों की जिंदगी में सड़क, नाला, सफाई और पानी की समस्याएं अब भी गांव जैसी ही हैं। शहर का दर्जा मिला, जमीन की कीमत बढ़ी, मगर पुराने हरनीचक की तकदीर अब भी सुविधाओं का इंतजार कर रही है।
करीब 25 साल पहले तक हरनीचक में खेती होती थी। चारों तरफ हरी-हरी फसलें लहराती थीं। खेती के कारण गांव आबाद और खुशहाल था। अब खेत खत्म हो गए और उनकी जगह मकान बन गए हैं। इससे गांव की पुरानी पहचान भी बदल गई है।
रमेश कुमार
गांव को शहर का दर्जा तो मिल गया, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलीं। आज भी हमलोग कई बुनियादी सुविधाओं के अभाव में रह रहे हैं। सड़क, नाला, सफाई और पेयजल की समस्या बनी हुई है। नगर निगम को लोगों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।शशि कुमार
हरनीचक शहर तो बन गया है, मगर हमलोगों के बीच आज भी गांव का माहौल कायम है। एक-दूसरे के सुख-दुख में सभी मिलते-जुलते हैं। शादी-विवाह और किसी भी उत्सव में पूरे गांव के लोगों को बुलाने की परंपरा आज भी कायम है।समुद्र कुमार
गांव शहर में बदल गया, लेकिन सुविधाएं उस हिसाब से नहीं मिलीं। हर साल करीब 200 नए घर आबाद हो रहे हैं। अब यहां न्यू पटना जैसा स्वरूप दिखने लगा है। नगर निगम को बढ़ती आबादी के अनुसार सड़क, नाला, पानी और सफाई की व्यवस्था करनी चाहिए।
विनोद कुमार
