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पटना एम्स में एंजियोग्राफी मशीन खराब, संकट में 40 हार्ट पेशेंट की जान

Published: Wed, 10 Jun 2026 05:56 AM (IST)

पटना एम्स में एंजियोग्राफी मशीन खराब होने से 40 हृदय रोगियों की जान खतरे में है, जिससे मरीजों और परिजनों ...और पढ़ें

पटना एम्स। फोटो जागरण

पटना एम्स। फोटो जागरण

संवाद सूत्र, फुलवारीशरीफ। हृदय संबंधी बीमारी के लिए एम्स में भर्ती लखीसराय निवासी मनीष मिश्रा का आपरेशन अभी नहीं हो सका है। इसी पीड़ा के बीच एक मरीज डॉ. मनीष मिश्रा ने राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और पटना के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है।

पत्र में उन्होंने लिखा है कि एंजियोग्राफी मशीन खराब रहने से गंभीर मरीजों का जीवन खतरे में है और कभी भी कोई अप्रिय घटना हो सकती है। मनीष अकेले नहीं हैं। इस कतार में कई मरीज हैं।

दरअसल, देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान एम्स पटना में इन दिनों हृदय रोगियों की जिंदगी मशीन की एक खराबी के कारण संकट में है। एंजियोग्राफी मशीन खराब होने के कारण दर्जनों मरीज उपचार के इंतजार में बेड पर पड़े हैं।

हालत ऐसी है कि जिन मरीजों को तत्काल एंजियोग्राफी और हृदय संबंधी प्रक्रिया की जरूरत है, वे दर्द और भय के बीच हर गुजरते पल को गिनने को मजबूर हैं।

जानकारी के अनुसार, करीब 40 हृदय रोगी एम्स में भर्ती हैं, जिनमें कई की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। चिकित्सकों द्वारा पहले ही आपरेशन की सलाह दी जा चुकी थी, लेकिन मशीन खराब होने के कारण मामला फंस गया है।

मंगलवार को आधा दर्जन मरीजों को यह कहकर लौटा दिया गया कि फिलहाल संस्थान उनके उपचार में असमर्थ है। इससे मरीजों और उनके स्वजन में गहरा आक्रोश है।

उपचार के इंतजार में कोई मरीज अपने छोटे बच्चों का चेहरा याद कर रहा है तो कोई परिवार की जिम्मेदारियों को लेकर चिंतित है। मरीजों का कहना है कि अगर एम्स में हृदय रोग का उपचार संभव नहीं है तो प्रशासन सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा कर दे, ताकि दूसरे मरीज यहां आकर परेशान न हों।

मरीजों के स्वजन का आरोप है कि अस्पताल में कई बेड खाली पड़े हैं, लेकिन उपचार के अभाव में मरीजों को वापस किया जा रहा है। अब सभी की निगाहें एम्स प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि कब ठोस कदम उठाया जाएगा।

मरीज बोले- यह जिंदगी के साथ खिलवाड़

एम्स में भर्ती एक हृदय रोगी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि संस्थान में एंजियोग्राफी मशीन महीनों तक खराब रहने वाली है और गंभीर मरीजों का उपचार नहीं हो सकता, तो एम्स प्रशासन एवं निदेशक को सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा कर देनी चाहिए।

मरीज ने आरोप लगाया कि एक ओर गंभीर हृदय रोगी बेड पर पड़े अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई मरीजों को उपचार में असमर्थता जताकर वापस लौटाया जा रहा है। उनका कहना है कि जब उपचार की व्यवस्था ही नहीं है तो मरीजों को बुलाकर उम्मीद क्यों दी जा रही है?

यह मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है। हृदय रोगियों और उनके स्वजन की मांग है कि या तो तत्काल मशीन दुरुस्त कर उपचार शुरू कराया जाए अथवा मरीजों को दूसरे सक्षम संस्थानों में रेफर करने की समुचित व्यवस्था की जाए।

एम्स पटना के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के पदाधिकारी असीम मिश्रा ने बताया कि एंजियोग्राफी मशीन पिछले दो दिनों से खराब है। मशीन को दुरुस्त करने का कार्य चल रहा है और इसे पूरी तरह चालू होने में अभी एक से दो दिन और लग सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इस अवधि में जिन मरीजों की स्थिति गंभीर है और जिन्हें तत्काल एंजियोग्राफी की आवश्यकता है उन्हें अन्य अस्पतालों में भेजकर जांच कराने की व्यवस्था की जा सकती है।

मशीन के पुनः चालू होने के बाद एम्स में नियमित रूप से यह सुविधा बहाल कर दी जाएगी। उन्होंने स्वीकार किया कि मशीन खराब होने के कारण मरीजों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, हालांकि अस्पताल प्रशासन वैकल्पिक चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है।

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